कोरोना के चक्कर में लपेटे में आये कांग्रेस नेता की पाती

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suryakant dhasmana

देहरादून। ‘गए थे नमाज पढऩे, रोजे गले पड़ गए’ वाली कहावत कांग्रेस नेताजी पर सटीक बैठती है। वह दून हॉस्पिटल मरीजों का हाल जानने पहुंचे थे। जिस पर वहां कोरोना वार्ड में जाने के कारण अब उन्हें कई दिनों तक घर के अकेले कमरे में ही रहना पड़ेगा। यही नहीं वह किसी भी मिल-जुल भी नहीं सकते। यह प्रतिबंध उन पर अतिसंवेदनशील कोरोना वार्ड में जाने के बाद लगाया गया है। उन्हें सीएमओ के यहां से भी हिदायत दी गई है। अब रोजाना सैकड़ों लोगों से मिलने-जुलने वाले नेता सूर्यकंत धस्माना अकेले कमरे में बैठकर असहज महसूस कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने प्रेस बंधुओं के नाम व आम लोगों को इस पाती के माध्यम से लिखकर अपनी बात बयां की है। आइए उनकी पाती आप भी पढि़ए ज्यों की त्यों:-

प्रेस बंधुओं के नाम
नमस्कार
आदरणीय बंधु , जैसा कि आपको विदित ही है कि कल दिनांक 16 मार्च को मैंने आप लोगों को प्रातः 10.6 पर सूचित किया था कि मैं दोपहर साड़े बारह बजे कोरोना से लड़ने की स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों का जायज़ा लेने दून हॉस्पिटल जाऊंगा। इस बारे में मैंने दून हॉस्पिटल के सीएमएस डॉक्टर के के टम्टा डिप्टी सीएमएस डॉक्टर खत्री व दून मैडीकल कालेज के पीआरओ संदीप राणा को भी उसी समय सुचित कर दिया था। मैँ 12.40 पर दून हॉस्पिटल पहुंचा और सीधे इमरजेंसी में पहुंचा और सीएमएस व डिप्टी सीएमएस के बारे में पूछा तो वहां उपस्थित स्टाफ ने बताया कि सीएमएस छुट्टी पर हैं और डिप्टी सीएमएस अपनी ओपीडी में हैं।

मैं डॉक्टर खत्री की ओपीडी में पहुंचा तो वहां उपस्थित गार्ड ने बताया कि डॉक्टर खत्री सुबह 10 बजे मीटिंग का बता कर गए हैं आने वाले होंगे। काफी देर इंतज़ार किया पर वे नहीं आये तो मैंने गार्ड से कहा कि मैंने उनको सुबह बताया था कि मैं कोरोना की तैयारियों के बारे में बात करने व व्यवस्थाओं को देखने आऊंगा तो गार्ड ने कहा कि जब तक वे आते हैं आप वार्ड देख आइये। उसने हमें बताया कि एक वार्ड नीचे भू तल पर है व दूसरा पहले तल पर। मैं पहले भू तल पर स्थित आइसोलेशन वार्ड की तरफ गया और नर्स से बात की तो उन्होंने मुझे बताया कि इस वार्ड में दो मरीज जो स्टूडेंट हैं उनको रखा गया है, जिनके सैम्पल लिए गए हैं रिपोर्ट आनी है , मैंने काफी दूर से उनमें से एक छात्र से पूछा कि वे कहां पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि वे दून बिजनेस स्कूल में पड़ते हैं व गोवा टूर में गए थे, आने पर उनका सैम्पल लिया गया।

इतनी जानकारी लेने के बाद मैं हाथ सैनिटाइजर से धोकर बाहर आ गया। इसके बाद मैं पहली मंजिल पर स्थित आइसोलेशन वार्ड की तरफ गया और वार्ड के बाहर नर्सिंग स्टेशन पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ से वार्ड में भर्ती मरीज की हालत के बारे में जानकारी ली। स्टाफ ने बताया कि अंदर भर्ती मरीज कोरोना पॉजिटिव है व उनका इलाज चल रहा है व स्थिति स्थिर व बेहतर है। मैं न तो आइसोलेशन वार्ड में गया न मरीज के पास गया न उनसे मिला। नर्सिंग स्टाफ ने मुझे बताया कि दो बेड वेंटिलेटर वाले भी तैयार रखे गए हैं।

आपको बताना चाहता हूं कि

1.हॉस्पिटल में प्रवेश करने से पहले ही मैंने डबल मास्क लगाया हुआ था, जो हॉस्पिटल से निकलने के बाद ही मैंने अपने कार्यालय पहुंच कर हटाया। हॉस्पिटल में प्रवेश करने व बाहर निकलने तथा वार्ड में नर्सिंग स्टेशन पर सैनिटाइजर से हाथ धोए।
2. मैंने अपने हॉस्पिटल पहुंचने की विधिवत सूचना हॉस्पिटल प्रशाषन व प्रेस को ढाई घण्टे पूर्व दे दी थी।
3. हॉस्पिटल में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी न तो मौजूद था और न ही कोई आइसोलेशन वार्ड के बाहर ऐसा इंतज़ाम था, जो किसी भी आगंतुक को यह बताए कि वार्ड में प्रवेश नहीं कर सकते और ना ही कोई ऐसा निर्देश लिखा गया था।
4. सबसे बड़े आश्चर्य की बात यह है कि उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल में जो कि अब मैडीकल कालेज भी है और जिसमें कोरोना मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाये गए हैं, वहां कोई जिम्मेदार अधिकारी और कोई मैडीकल एक्सपर्ट्स की टीम ही तैनात नहीं मिली। अगर वहां कोई टीम होती तो वह हमको बता सकती थी कि हम कहाँ तक जा सकते हैं।
5. जब पूरे देश और पूरी दुनिया में कोरोना का कहर जारी है और राज्य की राजधानी में एक कोरोना पॉजिटिव मरीज मिला है तो क्या जिस स्तर की तैयारी दून हॉस्पिटल में है वो पर्याप्त है किसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए?
6. हमारा पिछले वर्ष का डेंगू का अनुभव कितना भयावह रहा शायद आपको याद होगा? देहरादून में हज़ारों लोग डेंगू से पीड़ित हुए और कितने लोगों की मौत डेंगू से हुई। डेंगू के प्रकोप के बीच मैं लगातार दून हॉस्पिटल समेत सारे हॉस्पिटल्स के चक्कर काटता रहा, लोगों की सहायता के लिए।

कल भी मैं इसी उद्देश्य से गया था कि कोरोना से निपटने की स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों का जायज़ा लूं। पिछले सप्ताह ही महिला चकित्सालय में उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ की गर्भवती महिला की कहानी तो आपको याद ही होगी, जिसके पेट में 9 दिनों से मरा बच्चा तब आपरेशन कर के निकाला गया, जब मैंने हॉस्पिटल पहुंच कर मामले में अधिकारियों से नाराजगी जाहिर की।

मुझे जब भी जनता से जुड़ा कोई मामला, जिसमें मैं कुछ मदद कर सकता हूँ, संज्ञान में आता है तो मैं कुछ हो पाए या न हो पाए, लेकिन अपनी तरफ से कोशिश जरूर करता हूँ , ये मेरी स्वाभाविक प्रकृति है, जिसे मैं बदल नहीं सकता और इसीलिए कल मैं दून हॉस्पिटल पहुंच गया, अगर आप इसे मेरा दोष मानते हैं तो मुझे स्वीकार है।
मुझे कल रात्री सीएमओ डिप्टी सीएमओ दोनों के फोन आये। सीएमओ साहिबा ने कहा कि डीएम देहरादून ने उनको मुझसे बात करने को कहा है। उन्होंने पूरे प्रकरण पर जानकारी लेने के बाद मुझसे आग्रह किया कि क्योंकि मैं कोरोना वार्डस में गया हूँ तो मुझे अगले 14 दिनों तक एहतियात रखना होगा। उन्होंने सलाह दी कि मैँ अपने घर में एक अलग कमरे में रहूं। किसी से ज्यादा नहीं मिलूं, घर से बाहर ना जाऊं व अगर कोई स्वास्थ्य संबंधी असहजता महसूस करूँ तो उनको तुरंत सुचित करूँ। जिलाधिकारी व सीएमओ की सलाह स्वीकार कर अब मैं अगले 14 दिनों तक घर पर ही रहूंगा। हालांकि मेरा अटल विश्वास है तुलसी बाबा की उस चौपाई पर “हानि लाभ जीवन मरण यश अपयश विधि हाथ” लेकिन अपने राज्यवासियों शहर वासियों अपने मित्रों की कुशलता के लिए मुझे स्वास्थ्य विभाग व जिलाधिकारी की सलाह शिरोधार्य है।
मेरा सभी मित्रों से आग्रह है कि मेरी भावना से सभी को अवगत करवाने की कृपा करें।
सादर

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