डीए में कटौती के बाद लालबत्ती धारकों और सलाहकारों को सरकार से मुक्त करने की मांग

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डीए में कटौती पर सचिवालय संघ ने फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की मांग

देहरादून। सरकार द्वारा कोरोना संकट के चलते कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को रीज करने के फैसले की सेवा संघों में अलग-अलग प्रतिक्रिया हो रही है। उत्तराखंड सचिवालय संघ ने फैसले का प्रत्यक्ष विरोध के बिना सरकार से गैरजरूरी खर्चों में कटौती करने तथा लालबत्तीधारकों और सेवानिवृत्त लोगों को विभिन्न विभागों में सलाहकार के पदों से हटाने की मांग की है।
संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को वित्त सचिव अमित नेगी से भेंट की और डीए में कटौती के फलस्वरूप कर्मचारियों के हितों की पैरवी करते हुए ज्ञापन सौंपा। अध्यक्ष दीपक जोशी का कहना था कि कोरोना से निपटने में कर्मचारी वर्ग पूरी तरह सरकार के साथ खड़ा है।
उन्होंने कहा कि 18 माह तक डीए और महंगाई राहत में कटौती से इस बीच सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों के आर्थिक हित प्रभावित होंगे। इसलिए देय डीए की गणना सेवानिवृत्ति के समय की जाए। संघ ने जुलाई 2021 से देय होने वाले डीए के साथ जनवरी एवं जुलाई 2020 और जनवरी 2021 में देय डीए के प्रतिशत को सम्मिलित करने की भी मांग की है।
संघ ने फिजूलखर्ची पर रोक लगाते हुए अपर सचिव से ऊपर के स्तर के अधिकारियों के शिविर कार्यालय के नाम पर उपनल से लगाए गए कार्मिक हटाने तथा एक से अधिक वाहन के उपयोग पर प्रभावी रोक लगाने और सभी वाहनों की पूलिंग करने की भी मांग की है। संघ ने आर्थिक व कोरोना संकट के चलते लालबत्तीधारकों को भी कार्यमुत्त करने की मांग की है, ताकि खर्चों में कटौती के साथ संकट का सामना करने में मदद मिल सके। संघ सचिव राकेश जोशी ने बताया कि वित्त सचिव ने मांगों पर विचार कर उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।

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