चार नए जिलों की याद दिलाने निकला जन चेतना अभियान। हर जगह हो रहा जोरदार स्वागत

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चार नए जिलों की याद दिलाने निकला जन चेतना अभियान। हर जगह हो रहा जोरदार स्वागत

यमुनोत्री, कोटद्वार, रानीखेत व डीडीहाट को अलग जनपद बनाने की तत्कालीन मुख्यमंत्री निशंक ने 2011 में की थी घोषणा

उत्तराखंड में चार अलग जनपदों की मांग तेज हो गई है। इसको लेकर उत्तरकाशी जनपद से अभियान शुरू हो गया है, जो चारों जनपदों के लोगों को जागरूक करेगा।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने आठ वर्ष पूर्व 15 अगस्त 2011 में प्रदेश में चार नए पृथक जिलों के निर्माण की घोषणा की थी। लेकिन आज एक दशक बीतने के बावजूद अपने अस्तित्व में नहीं आ पाए हैं।
लोग लगातार इन जिलों को अस्तित्व में लाने की प्रदेश सरकार से मांग कर रहे हैं। बावजूद इसके कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं की जा रही है। जिसको लेकर संघर्ष समिति जन जागरूकता एवं जनचेतना अभियान के माध्यम से पृथक जनपदों के सभी लोगों को साथ लेकर वृहद स्तर पर आंदोलन चलाने की तैयारी में हैं। जिसके लिए जन जागरण अभियान चलाया जा रहा है।
इन चार जिलों की मांग को लेकर बड़कोट, नौगांव व पुरोला-मोरी के बाद बुधवार को जनजागरूकता जत्था कोटद्वार के लिए रवाना हो गया है।

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पूर्व घोषित चार जनपदों को अस्तित्व में लाने की मुहिम को संयुक्त घोषित जनपद संघर्ष समिति की मंगलवार को यमुनोत्री-बड़कोट से शुरू हुई दर्जनभर आंदोलनकारियों का जागरूकता जत्था नौगांव होते हुए मंगलवार को देर सायं पुरोला बाजार पहुंचा।
पुरोला पहुंचने पर जनपद निर्माण संघर्ष समिति जत्थे का लोगों ने स्वागत किया। जत्थे ने बाजार में व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं से पृथक जनपद निर्माण को लेकर चर्चा व रायशुमारी की व सरकार पर पूर्व घोषित जनपदों को अस्तित्व में लाने व जल्द निर्माण को दबाव बनाने में जन सहयोग की अपील की।
संघर्ष के जागरूकता अभियान जत्थे में शामिल विशालमणी रतूड़ी अब्बलचंद कुमाई ने लोगों को भरोसा दिया कि चारों जनपदों में जागरूकता व लोगों से रायशुमारी के बाद संघर्ष समिति मुख्यमंत्री को मिलकर चारों जनपदों को तत्काल अस्तित्व में लाने के बारे में वार्ता करेगी।
कुमांई ने बताया कि जनजागरूकता एवं जनचेतना यात्रा मंगलवार को यमुनोत्री से शुरू हुई, जो कोटद्वार, रानीखेत होते हुए डीडीहाट तक जाएगी व 12 नवंबर से 17 नवंबर तक चलने वाले इस जनचेतना अभियान के तहत संघर्ष समिति लोगों को जागरूक करेगी व पृथक जनपद निर्माण के लिए लोगों से आगे आने का आह्वान करेगी।
जन चेतना अभियान यात्रा में अब्बल चंद कुमांई, विशालमणी रतूड़ी, रामानंद डबराल, भरत सिंह चौहान, गुलाब सिंह जयाड़ा, नरोत्तमदत्त रतूड़ी, फकीर लाल, महिपाल असवाल, बलबी, शूरबीर सिंह राणा, सुरेंद्र पुजारी, सुरपाल सिंह चौहान, मोहन दास, भगवानदास, राजेश आदि शामिल हैं।
(साभार: नीरज उत्तराखंडी)

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