आईटीआई कालेज में एससी स्टूडेंट के प्रवेश पर रोक से बढ़ी समस्या

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iti gwaspul

मुख्यधारा ब्यूरो
देहरादून। यूं तो पिछले वर्षों तक जनजाति आईटीआई कालेज ग्वासपुल चकराता में सभी वर्गों के छात्रों को प्रवेश दिया जाता रहा है, लेकिन इस बार एससी छात्रों को प्रवेश देने पर रोक लगाए जाने के बाद इन छात्रों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। ऐसे में इस वर्ग के छात्रों को भी प्रवेश देने के लिए सचिव और प्रधानाचार्य के समक्ष गुहार लगाई गई है।

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देहरादून जनपद के अंतर्गत राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान ग्वासपुल चकराता, देहरादून में इस बार एससी छात्रों को प्रवेश दिए जाने से रोक लगाई गई है। इस संबंध में आईटीआई में प्रवेश पाने से वंचित हो रहे छात्रों ने उत्तराखंड शासन में जनजाति कल्याण विभाग के सचिव को पत्र भेजकर शिकायत की है।

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छात्रों का कहना है कि ग्वासपुल चकराता आईटीआई कालेज में वर्ष 2020-21 की प्रवेश प्रक्रिया के दौरान संस्थान में विभिन्न ट्रेडों के फार्म भरे जा रहे हैं। इसकी अंतिम तिथि 26 अगस्त 2020 से शुरू होकर 9-9-2020 तक है , लेकिन इसमें अनुसूचित जाति के छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

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बताया गया कि वर्ष 2004 से 2018 तक इस कालेज में सभी जाति वर्ग के छात्रों को प्रवेश दिया जाता रहा है, किंतु इस बार प्रधानाचार्य द्वारा इस पर रोक लगाई गई है।
बताते चलें कि जनजाति क्षेत्र में सबसे गरीब वर्ग के अनुसूचित जाति वर्ग के छात्र ही हैं। ऐसे में यदि उन्हें अपने नजदीकी आईटीआई कालेज में प्रवेश से वंचित किया जाएगा तो उनका भविष्य अंधकारमय की ओर जा सकता है। क्षेत्रवासियों ने सचिव से मामले में हस्तक्षेप कर शीघ्र ही अनुसूचित जाति वर्ग के छात्र-छत्राओं को भी इस कालेज में प्रवेश दिलाने की मांग की है, जिससे वे भी तकनीकि शिक्षा हासिल कर सकें।

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इस संबंध में जब आईटीआई कालेज के प्रधानाचार्य अनिल कुमार सिंह से पूछा गया तो उनका कहना था कि यह कालेज जनजाति कल्याण निदेशालय द्वारा संचालित होता है। ऐसे में यह केवल एसटी के छात्रों के लिए ही है। यह सही है पूर्व में एससी के छात्रों को भी प्रवेश दिया जाता था, लेकिन जब इस पर आपत्ति आई तो इस बार से इसमें सुधार किया जा रहा है। श्री सिंह ने कहा कि यदि सीट खाली रहती हैं तो दोबारा जनजाति छात्रों के लिए विज्ञापन निकाला जाएगा। इस कालेज के अलावा एक गूलरभोज और एक खटीमा में भी इस तरह के कालेज संचालित हैं। वहां भी इसी तरह का प्रावधान है।
इस संबंध में जब जनजाति कल्याण विभाग के निदेशक सुरेश चन्द जोशी से पूछा गया तो उनका कहना है कि नियमों में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। इस बार भी पूर्व की भांति पहली प्राथमिकता एसटी के बच्चों को दी जाएगी और यदि सीटें खाली रही तो फिर उन पर एससी के छात्रों को भी प्रवेश दिया जाएगा। श्री जोशी ने बताया कि जनजाति कल्याण विभाग में पूर्ण रूप से एसटी के बच्चों के कल्याण लिए ही बनाया गया है। इसलिए उन्हें प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जनजाति के 16 स्कूल और तीन आईटीआई कालेज हैं।
बहरहाल, यदि कालेज में पूर्व की भांति व्यवस्था बनी रहती है तो इससे एससी वर्ग के गरीब छात्रों को भी पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा। ऐसे में अब देखना यह होगा कि कालेज प्रशासन इस मामले में क्या निर्णय ले पाता है!

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