किसकी ‘प्रीतम’ है कांग्रेस की नई कार्यकारिणी!

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किसकी ‘प्रीतम’ है कांग्रेस की नई कार्यकारिणी!

राहुल सिंह शेखावत 

आखिरकार उत्तराखंड कांग्रेस की बागडोर संभालने के बाद प्रीतम सिंह की बहुप्रतीक्षित टीम घोषित
हो ही गई। कमोबेश पौने तीन साल के लंबे इंतजार के बाद प्रदेश जंबो कार्यकारिणी की घोषणाा हुई है। जिसमें 22 उपाध्यक्ष, 31 महामंत्री,98 सचिव बनाए गए हैं। कार्यकर्ताओं की कमी से जूझ रही कांग्रेस में नेताओं की खेप तैयार हो गई है।

एक पूर्व सांसद समेत 7 विधायक उपाध्यक्ष और 3 अन्य पूर्व विधायक महामंत्री की फेहरिस्त में शामिल हैं। जबकि विधानसभा चुनाव में बगाबत करने वाले नेताओं पर भी ‘प्रीतम-कृपा’ बरसी है। सचिव बनाए जाने से नाराज धारचूला के विधायक हरीश धामी ने इस्तीफा देने का एलान करने में देरी नहीं की।

सबसे पहले ‘टीम-प्रीतम’ में उपाध्यक्ष का ओहदा हासिल करने वाले प्रमुख नेताओं पर गौर करते हैं। इस फेहरिस्त में नैनीताल के पूर्व सांसद महेंद्र सिंह पाल, पूर्व विधायक गणेश गोदियाल, विक्रम नेगी, मयूख महर, मदन सिंह बिष्ट, विजयपाल सजवाण और नारायण पाल के नाम शामिल हैं।

कभी पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ‘अंगद’ रहे पूर्व विधायक रणजीत रावत को भी मौका मिला है। वहीं, तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के खिलाफ बागी लड़ने वाले आर्येन्द्र शर्मा को उपाध्यक्ष बने हैं। दिलचस्प बात ये है कि रणजीत अब ‘हरदा’ राहें जुदा कर चुके हैं। शर्मा की हरीश रावत विरोधी खेमे में गिनती होती है।

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गौरतलब है कि शर्मा पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के OSD भी रहे हैं। पंचायत राजनीति में अच्छी पकड़ रखने वाले जोत सिंह बिष्ट और राजधानी में सक्रिय रहने वाले सूर्यकांत धस्माना रिपीट हुए हैं।

आइए अब एक नजर डालते हैं उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के नए महासचिवों पर। इस ओहदे पर विजय सारस्वत की चिपक बरकरार है। प्रीतम के करीबी संजय पालीवाल भी इस फेहरिस्त में शामिल हैं।

यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजपाल खरौला, आनंद रावत और भुवन कापड़ी को मौका मिला है। वहीं, पूर्व विधायक हेमेश खर्कवाल, प्रोफेसर जीतराम और ललित फर्सवाण को महासचिव बनाया गया गया है।

दिलचस्प बात ये है कि दो बार के विधायक और दर्जा धारी कैबिनेट मंत्री रहे हरीश धामी का नाम सचिवों की लिस्ट में था। जिससे गुस्साए धामी ने ना सिर्फ इस ओहदे को छोड़ने का खुला ऐलान बल्कि पार्टी छोड़ने तक की धमकी दे डाली।

कहने की जरूरत नहीं है कि हरीश रावत, प्रीतम सिंह, डॉ इंदिरा हृदयेश और किशोर उपाध्याय के बीच अंदरूनी खींचतान है। जिनकी पसंद अथवा नापसंद के फेर में कई ऊर्जावान नेताओं को मौका नहीं मिल पाया। इस कवायद में कुछेक जनाधारविहीन एवं प्रभावहीन नेताओं की लॉटरी खुली है। मुझे नहीं मालूम कि पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी की सांगठनिक कार्यों में दक्षता का लाभ क्यूं नहीं लिया गया।

वैसे रिपीट हुए पूर्ववर्ती कार्यकारिणी में आधा दर्जन से ज्यादा उपाध्यक्ष एवं महासचिवों की परफॉर्मेंस पर गौर करने जरूरत थी। कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी घोषित होने के बाद असंतोष ना फैले इसलिए लिस्ट हाईकमान से जारी करवाई गई। लेकिन हरीश धामी के तेवरों से साफ है कि आने वाले दिनों में रार बढ़ेगी।

बहरहाल, ये आने वाला वक्त तय करेगा कि प्रीतम अपनी नई टीम के सहारे पस्त पड़ी कांग्रेस में कितनी जान फूंक पाएंगे।

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