पीडब्ल्यूडी के दो इंजीनियर सस्पेंड। सड़क निर्माण में बन रहे थे बाधक

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देहरादून। फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टनकपुर-जौलजीवी मोटरमार्ग के सड़क निर्माण का टेंडर पास कराने और इस प्रक्रिया में जानबूझकर अनावश्यक देरी करने सहित हीलाहवाली के मामले में लोक निर्माण विभाग के दो इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया गया है।
बताते चलें कि पिथौरागढ़ के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता मयन पाल सिंह वर्मा और प्रभारी अधीक्षण अभियंता मनोहर सिंह को सड़क निर्माण के लिए जारी किए गए टेंडर प्रक्रिया में देरी करने का दोषी पाया गया है। भारत सरकार गृह मंत्रालय ने करीब 110 करोड़ रुपये इस रोड निर्माण के लिए सरकार को जारी किए।
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि जिस दिलीप सिंह नाम के ठेकेदार को अधिकारियों ने ठेका दिया, वह फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर दिया गया। जब यह मामला पकड़ में आया तो इसे रद्द किया गया। लेकिन बताया गया कि ठेकेदार ने टेंडर के लिए कोर्ट से स्टे ले लिया था। हालांकि विभाग ने उस स्टे को हाईकोर्ट में चैलेंज कर दिया। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया और सड़क निर्माण कार्य लटकता चला गया।
मार्च अंत में कोरोना संकट गहराने के कारण टेंडर नहीं किया जा सका और मोटर मार्ग निर्माण रुक गया। इस पर यह मामला मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के संज्ञान में आया और उन्होंने विभागीय सचिव को इस पर कार्रवाई करने को कहा। जिस पर पीडब्ल्यूडी के सचिव आरके सुधांशु ने दोनों अभियंताओं के सस्पेंड का आदेश जारी किया है।

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