गुड न्यूज : प्रसाद की ऑनलाइन बिक्री से दूर होगा आजीविका का संकट।  विधायक भरत चौधरी ने दिए अभिनव सुझाव

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रमेश पहाड़ी 

केदारनाथ की यात्रा बन्द होने के कारण प्रसाद बनाने वाले महिला समूहों की आर्थिकी पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव को प्रसाद की ऑनलाइन बिक्री से कम किया जायेगा। आजीविका सम्वर्द्धन की इस पहल को अत्यंत उपयोगी बताते हुए विधायक भरत सिंह चौधरी ने कहा कि इसे अधिक आकर्षक और व्यापक बनाकर इस काम में लगे समूहों की आजीविका पर आ खड़े हुए संकट को न केवल कम किया जा सकता है, बल्कि इसे विश्वव्यापी बनाकर आर्थिक समृद्धि का एक नया आधार तैयार किया जा सकता है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की जिला प्रबन्धन इकाई, रुद्रप्रयाग द्वारा विकास भवन में आयोजित केदारनाथ प्रसाद की ऑनलाइन बुकिंग का शुभारंभ करते हुए विधायक चौधरी ने लीक से हटकर कुछ अभिनव प्रयोगों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग से निश्चित रूप से इस व्यवसाय को एक नया बाजार मिलेगा, बल्कि इसे वैश्विक बाजार मिलेगा और जो श्रद्धालु सुदूर देशों-प्रदेशों से यहाँ पहुँचने में असमर्थ हैं, उन्हें घर बैठे ही प्रसाद प्राप्त करने की सुविधा प्राप्त होगी। इससे प्रसाद निर्माण में लगे समूहों की आर्थिकी को व्यापकता के साथ विस्तार भी मिलेगा।
एक भेंट में विधायक भरत सिंह ने बताया कि हमारे पास वैश्विक ख्याति के ब्रांड उपलब्ध हैं। हमें उनका लाभ उठाना चाहिए। हिलांस नाम की बजाय यदि प्रसाद का नाम केदारनाथ प्रसाद हो तो उसको स्वतः ही बड़ी पहचान मिल जाएगी। विदेशों में भी लोग इसे मंगाना चाहेंगे। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगा, हिमालय जैसे विश्वप्रसिद्ध ब्रांडों के सामने हिलांस एक अल्प परिचित नाम है।
उन्होंने कहा कि रामदाना पहाड़ों का एक महत्वपूर्ण जैविक उत्पाद है, जिसका लड्डू प्रसाद में दिया जा रहा है। इसमें चीनी मिलाकर इसे अजैविक बनाया जा रहा है। इसलिए चीनी की बजाय लड्डू में पहाड़ी शहद का उपयोग किया जाना अधिक उपयोगी होगा, क्योंकि तब यह पूर्ण जैविक होगा, जिसकी विश्व बाजार में बड़ी माँग होगी। विधायक चौधरी ने कहा कि केदार जल के नाम से कतिपय व्यापारी यहाँ के पानी का व्यापार कर रहे हैं। हमारे प्रसाद के डिब्बे में 100 मिली. की शीशी केदार जल की भी रखी जाये तो उसके कारण भी प्रसाद की माँग काफी बढ़ जाएगी। भले ही प्रसाद की कीमत कुछ बढ़ जाएगी।
उन्होंने कहा कि हमारे पास ब्रांडों की कमी नहीं है, लेकिन आवश्यकता उनको बाजार के अनुरूप मार्केटिंग के कौशल एवं अभिनव प्रयोगों के साथ जोड़ने की है। इसमें महिला समूह और बेरोजगार युवा आगे आएंगे तो उन्हें सरकार तथा वे स्वयं हर सम्भव सहयोग करने को प्रतिबद्ध हैं।

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