रेलवे व स्थानीय प्रभावितों के साथ जिलाधिकारी ने की बैठक। सुमेरपुर, तिलनी, रतूड़ा के प्रभावितों ने उठाई विस्थापन की मांग

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रेलवे निर्माण से छतिग्रस्त हुए रास्तों, सड़कों, बिजली, पानी, नालियों का शीघ्र हो नव निर्णाण

प्रभावितों ने स्थानीय लोगों को प्रमुखता से रोजगार देने का उठाया मामला

जिलाधिकारी ने समस्याओं के समाधान का दिया आश्वासन

बेघर हो चुके 8 अनुसूचित जाति के परिवारो ने उठाई पुनर्विस्थापन की मांग

सत्यपाल नेगी/रुद्रप्रयाग

रुद्रप्रयाग के तिलनी, सुमेरपुर, रतूड़ा में रेलवे द्वारा किये जा रहे कार्यों से नाराज स्थानीय जनता की शिकायतों पर जिलाधिकारी मनुज गोयल ने बैठक की।

आपको बताते चलें कि उत्तराखण्ड में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का निर्माण कार्य चल रहा है। इस दौरान यहां के ग्रामीणों की जमीनें रेलवे ने खरीदी हैं, किंतु लोगों को रोजगार व क्षतिग्रस्त स्थानीय विकास कामों पर ठोस कार्य न होने से प्रभावित ग्रामीण नाराज हैं। रेलवे की कार्य प्रणाली पर सवाल भी उठाते नजर आ रहे हैं।
आज जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग ने रेलवे के अधिकारियों एवं स्थानीय प्रभावितों के साथ जन समस्याओं पर लंबी चर्चा करके समाधान की कोशिशें की।
तिलनी, सुमेरपुर, रतूड़ा के सैकड़ों भूमि प्रभावितों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को जिलाधिकारी व रेलवे के सामने रखी, जिसमें भूमिहीन हो गये परिवारों को जमीन देने, आवास बनाने, पानी-बिजली, सड़क में सुधार करने तथा स्थानीय प्रभावितोंं को रोजगार देने की माँगें प्रमुखता से उठाई।


वहीं रतूड़ा के 8 अनुसूचित जाति परिवार के लोगों ने डीएम के सामने विस्तापन की माँग रखी। इन गरीब परिवारों की भूमि व आवास दोनों ही रेलवे के अंडर चले गये हैैं, जिससे ये सभी परिवार बेघर व भूमिहीन हो चुके हैं। इन लोगों ने कहा कि हमें जमीनों का पैसा नहीं चाहिए, हमको जमीन व घर बनाकर दिया जाए।
जिलाधिकारी ने एसडीएम रुद्रप्रयाग को निर्देश दिए कि तुरन्त राजस्व भूमि चयनित करें और जहाँ पर सभी सुविधाएं आसानी से दी जा सके।
प्रभावितों ने गाँवों के रास्ते, सड़क, बिजली, पानी, मंदिर व श्मशान घााटों के क्षतिग्रस्त मार्गों को शीघ्र ठीक करवाने की बात कही। जिस पर जिलाधिकारी ने रेलवे व सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों को निर्देश देते हुए तुरन्त कार्य की प्रगति रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर देने को कहा।
सुमेरपुर में बारातघर व पंचायत भवन के साथ-साथ आंगनबाड़ी भवन, प्राथमिक स्कूल भवन और गाँव के लिए 2 किलोमीटर सड़क बनाने की स्वीकृति दी।
प्रभावितों ने आरोप लगाते हुए मांग की कि बाहरी लोगों के बजाय जमीन देने वाले स्थानीय बेरोजगारों को ही नौकरी, ठेके, रोजगार दिया जाए।
बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीणों के अलावा सभी विभागों के अधिकारी, रेलवे के अधिकारी एवं स्थानीय प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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