गुड न्यूज़ : देखिए एक सरकारी कर्मचारी किस तरह उगा रहे हैं शुद्ध आर्गेनिक सब्जियां। आप भी ले सकते हैं प्रेरणा

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सब्जी उत्पादन के प्रति बढ़ने लगा लोगों का रुझान, ग्रामीण इलाकों में अपार संभावनाएं

सत्यपाल नेगी/रुद्रप्रयाग

कहते हैं मन में कुछ कर गुजरने की यदि दृढ़ इच्छा हो तो कोई भी काम असंभव नहीं है। ऐसे ही एक सरकारी कर्मचारी ने अपनी दृढ़ इच्छा से रुद्रप्रयाग जनपद के एक गांव में शुद्ध जैविक सब्जियों की खेती करके एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने उन तमाम बेरोजगार युवाओं को एक ऐसा  प्रेरणाप्रद संदेश देने की कोशिश की है, जो रोजगार के नाम पर पहाड़ों से पलायन कर मैदानी शहरों में जाकर 8-10 हजार की नौकरी में अपना पूरा जीवन खपा देते हैं।

आइए आपको भी रूबरू करवाते हैं रुद्रप्रयाग जनपद के इस सच्चे कर्मवीर से

जनपद रुद्रप्रयाग के दूरस्थ क्षेत्र सारी न्याय पंचायत की ग्राम बैसोड़ के आनन्द सिंह बिष्ट अपनी खेती में सब्जी उत्पादन में लगे हैं। आनन्द सिंह कहते हैं कि आज बाजार में जिस प्रकार सब्जियों के दाम आसमाान छू रहे हैं, ऐसे में हमें महंगाई से बचने के लिए खुद मेहनत करनी होगी, ताकि महंगाई से भी बचा जाय और शुद्ध सब्जियां भी घर में मिल जाये।
आनन्द सिंह बताते हैं कि वह मनरेगा विभाग में कार्यरत हैं। अपनी ड्यूटी करने के बाद वे लोगों को प्रेरणा भी दे रहे हैं कि किस प्रकार समय का सदुपयोग हो। वे अपनी ड्यूटी के बाद घर आकर खुद अपनी खेती में सब्जी उगाने में लग जाते हैं।
गोभी, राय, मूली, पालक आदि से वे अपने परिवार का भरण पोषण भी कर रहे हैं। साथ ही गाँव के लोगों को भी घर पर ही शुद्ध सब्जियां खरीदने को मिल रही हैं।

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उनका कहना है कि बाजारों पर निर्भर होने की आदत हमें खत्म करनी होगी और खुद परिश्रम करके अपने आपको सक्षम बनाना होगा, तभी महंगाई से भी बचा जा सकेगा। वे सभी युवाओं को एक सीख भी दे रहे हैं कि फालतू घूमने व फालतू बैठने से अच्छा है कि कुछ न कुछ कार्य करते रहें। सभी पहाड़ी लोगों को इनसे सीख लेनी चाहिए।

आनंद सिंह कहते हैं कि सब्जी उत्पादन में पहाड़ों में भरपूर संभावनाएं हैं। यहां युवाओं के रोजगार का एक बेहतर विकल्प हो सकता है, बशर्ते युवा नौकरी की चाह को त्याग कर स्वरोजगार की राह को अपनाने का दृढ संकल्प ले सकें। उन्होंने कहा कि यह ऐसा रोजगार है, जिसमें व्यक्ति को घर बैठे बाजार भी उपलब्ध हो सकता है। यानी कि आपके उत्पादन को गांव की दुकान में ही खरीददार मिल जाते हैं। यही नहीं वस्तु का भुगतान करते समय शुद्ध ऑर्गेनिक चीजें उपलब्ध करवाने के लिए वह धन्यवाद भी देते हैं। ऐसे में आप पहाड़ों से अपने गांव को खाली होने से भी बचा सकते हैं और अपने घर में ही आपको रोजगार भी उपलब्ध हो सकेगा।

बहरहाल उत्तराखंड में आनंद सिंह जैसे कुछ ही ऐसे लोग होंगे, जो विपरीत धारा में बहने का साहस रखते हों। अब देखना होगा कि उनके द्वारा दी गई इस प्रेरणा से कितने लोग प्रेरित हो सकते हैं।

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