भाजपा की स्थापना दिवस से पहले मोदी सरकार के लिए गए फैसले से संघ भी खुश, वक्फ बोर्ड पर “कंट्रोल” की काफी पहले से लिखी गई पटकथा
(केंद्र सरकार ने अपने तीसरे कार्यकाल में अब तक सबसे ऐतिहासिक फैसले पर मुहर लगा दी। बजट सत्र के दूसरे चरण में मोदी सरकार ने वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा से पारित करा लिया। हालांकि इस विधेयक को पारित करने के लिए पिछले काफी समय से भाजपा और आरएसएस में पटकथा लिखी जा रही थी । इसी महीने चैत्र नवरात्रि के पहले दिन 30 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की संघ मुख्यालय नागपुर में मुलाकात भी हुई थी। दोनों की मुलाकात के बाद ही अटकलें का दौर भी शुरू हो गया था कि जल्द ही केंद्र कोई नया ऐतिहासिक फैसला लेने जा रहा है। बिल कानून बनने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास भेज दिया। अब आने वाले समय में यह विधेयक कानून बन जाएगा और सरकार का वक्फ बोर्ड पर “कंट्रोल” हो जाएगा। सदन में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष को जवाब देने के लिए गृहमंत्री अमित शाह दोनों मोर्चा संभाले रहे। केंद्र सरकार ने यह बिल ऐसे समय संसद से पास किया है जब भाजपा रविवार 6 अप्रैल को अपना 45वां स्थापना दिवस मनाने जा रही है । केंद्र के इस ऐतिहासिक फैसले से आरएसएस जरूर खुश होगा।)
शंभू नाथ गौतम
अंत भला तो सब भला। देर आए दुरुस्त आए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शायद केंद्र की मोदी सरकार से यही कहा होगा। आरएसएस यह भी जानता था कि इस बार मोदी सरकार अपने बलबूते पर सरकार नहीं बना सकी।
केंद्र की भाजपा सरकार बनाने में इस बार चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी और नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का अहम रोल है । इसके बावजूद केंद्र सरकार ने अपने तीसरे कार्यकाल में अब तक सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसले पर मुहर लगा दी।
मोदी सरकार ने वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा से पारित करा लिया। हालांकि इस विधेयक को पारित करने के लिए पिछले काफी समय से भाजपा और आरएसएस में पटकथा लिखी जा रही थी। इसी महीने चैत्र नवरात्रि के पहले दिन 30 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की संघ मुख्यालय नागपुर में मुलाकात भी हुई थी। दोनों की मुलाकात के बाद ही अटकलें का दौर भी शुरू हो गया था कि जल्द ही केंद्र कोई नया ऐतिहासिक फैसला लेने जा रहा है। लेकिन सबसे ज्यादा विरोध का खतरा अपनी ही सरकार में शामिल जेडीयू और टीडीपी से था । ऐनमौके पर चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार को भी भाजपा ने मना लिया। 31 जनवरी से शुरू हुए संसद के बजट सत्र में केंद्र ने कई विधेयक पारित किए। संसद का पहला बजट सत्र 13 फरवरी को समाप्त हो गया। दूसरा बजट सत्र 10 मार्च से शुरू हुआ।
दूसरे सत्र में भी मोदी सरकार वक्फ संशोधन विधेयक सदन में पेश करेगी या नहीं, आखिरी समय तक सस्पेंस बना रहा। बजट सत्र का दूसरा चरण खत्म होने से एक दिन पहले यह विधेयक दोनों सदनों से पारित कराया गया। बिल को केंद्र की सरकार में शामिल टीडीपी, जेडीयू और एलजेपी ने समर्थन दिया। वहीं, विपक्ष ने इस विधेयक को लेकर कई आपत्तियां उठाईं। विपक्ष का कहना था कि यह वक्फ बोर्डों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप करेगा और मुसलमानों के धार्मिक मामलों में सरकार का अतिक्रमण होगा।
इससे पहले चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह भारत सरकार का कानून है और इसे सभी को स्वीकार करना होगा। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह समाज में भ्रम फैला रहे हैं और मुसलमानों को डराकर उनका वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष के विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन बिल कानून बनने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास भेज दिया । अब आने वाले समय में यह विधेयक कानून बन जाएगा सरकार का अब वक्फ बोर्ड पर “कंट्रोल” हो जाएगा। केंद्र सरकार ने यह बिल ऐसे समय संसद से पास किया है जब भाजपा रविवार 6 अप्रैल को अपना 45वां स्थापना दिवस मनाने जा रही है। केंद्र की भाजपा सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले से आरएसएस जरूर खुश होगा । इस विधेयक के कानून बनने पर जहां भाजपा सरकार गदगद है वहीं विपक्ष और कई मुस्लिम संगठन विरोध जता रहे हैं। उल्लेखनीय है कि भारत के धार्मिक और सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य के विविधतापूर्ण ताने-बाने में वफ्फ बोर्ड एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्था है, लेकिन यह अब तक पूर्ण क्षमता का उपयोग नहीं कर पाई है। इस्लामी आध्यात्मिक परंपरा में गहराई से समाई हुई यह वैधानिक इकाई भारत में मुस्लिम समुदाय की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों को बदलने की क्षमता रखती है।
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हालांकि अपनी समृद्ध विरासत और विशाल भूमि संपत्तियों के बावजूद वफ्फ अक्षमताओं, कुप्रबंधन और पारदर्शिता की कमी की वजह से पिछड़ गया है। यह वास्तव में विरोधाभासी है कि भारत में तीसरी सबसे बड़ी भूमि स्वामित्व वाली इकाई के रूप में वफ्फ एक ऐसे समुदाय की देखरेख करता है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के मुद्दों से जूझ रहा है। सदियों पहले स्थापित वफ्फ का मूल उद्देश्य मुस्लिम समुदाय के लिए स्कूल, अस्पताल, पुस्तकालय और अन्य परोपकारी संस्थानों की स्थापना और देखरेख करना था।
यह चिंता का विषय है कि इतना विशाल संसाधन आधार होने के बावजूद इन्हें समुदाय के कल्याण के लिए प्रभावी रूप से उपयोग में नहीं लाया जा रहा है। ऐसे में वफ्फ बोर्ड में सुधार अत्यंत आवश्यक हैं, क्योंकि मुस्लिम समुदाय में व्यापक रूप से यह सहमति बन चुकी है कि वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग हुआ है। वक्फ बोर्ड की अक्षमताओं के कारण इन संपत्तियों का सर्वोत्तम उपयोग नहीं हो पाया है। कई संरक्षकों की अयोग्यता के चलते वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी ने अक्षमताओं और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है।