हिम तेंदुआ हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की आत्मा है, इसकी रक्षा करना है सभी की नैतिक जिम्मेदारी
गोपेश्वर/मुख्यधारा
केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग गोपेश्वर वनों एवं वन्य जीव-जंतुओं के संरक्षण को लेकर सदैव तत्पर रहता है। ऐसे में आज अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस के अवसर पर वन प्रभाग के लोहवा रेंज द्वारा गैरसैंण में न केवल योग अभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया, बल्कि हिम तेंदुआ को हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की आत्मा से संबोधित कर इसकी रक्षा करने के लिए सभी को संकल्प भी दिलाया गया।
अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस 23 अक्टूबर 2025 के अवसर पर आज केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग गोपेश्वर के अंतर्गत लोहवा रेंज द्वारा आयुष वैलनेस सेंटर, भराड़ीसैंण, गैरसैंण में एक विशेष योग अभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी सर्वेश कुमार दुबे के निर्देशानुसार तथा वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप गौड़ के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महावीर सिंह रावत, अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा उपस्थित रहे। साथ ही पार्षद मंगल नारायण सिंह पंवार सलियाणा वार्ड, सभाषद हरेन्द्र सिंह पंवार वार्ड सं. 2, वन पंचायत सरपंच बीरेन्द्र सिंह रीठिया, कृपाल सिंह, वन पंचायत सरपंच मरोड़ा योग आचार्य वीरेन्द्र सिंह नेगी, अवतार सिंह रावत डिप्टी रेंजर, सतीश कुमार, वन दरोगा कु. ऋतु सती, वन दरोगा आर०एस० बर्तवाल, (कार्यालय प्रभारी) कु. शशि, बीट अधिकारी जंगवीर सिंह बिष्ट वन दरोगा सहित लोहवा रेंज के समस्त फील्ड स्टाफ ने सक्रिय सहभागिता की।

कार्यक्रम के दौरान सभी मुख्य अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने हिम तेंदुआ संरक्षण के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि नियमित योग अभ्यास न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक संतुलन और प्रकृक्ति के प्रति संवेदनशीलता को भी बढ़ाता है, जो वन्य जीवों की रक्षा हेतु आवश्यक है।
हिम तेंदुआ केवल एक विलुप्तप्राय प्रजाति नहीं, बल्कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की आत्मा है। इसकी रक्षा करना हमारी सांस्कृक्तिक, पारिस्थितिक, और नैतिक जिम्मेदारी है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि यदि हम आज इसके आवासों की रक्षा करते हैं, तो आने वाली पीढ़ियाँ भी इसकी रहस्यमयी सुंदरता का अनुभव कर सकेंगी।
कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल हिम तेंदुआ के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना था, बल्कि स्थानीय समुदायों को इस प्रयास में सहभागी बनाना भी था। योग अभ्यास के माध्यम से स्वास्थ्य और संरक्षण को जोड़ते हुए यह आयोजन एक प्रेरणादायक पहल सिद्ध हुआ।


