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यमकेश्वर के मांझी पूर्व सैनिक सुदेश भट्ट ने सुद्धोवाला जेल से भेजी चिट्ठी – पुलिस पर जबरन मुजरिम बनाकर सलाखों के पीछे भेजने का आरोप लगाया

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यमकेश्वर के मांझी पूर्व सैनिक सुदेश भट्ट ने सुद्धोवाला जेल से भेजी चिट्ठी – पुलिस पर जबरन मुजरिम बनाकर सलाखों के पीछे भेजने का आरोप लगाया

देहरादून/मुख्यधारा

यमकेश्वर के मांझी के रूप में विख्यात पूर्व सैनिक एवं पर्वतारोही सुदेश भट्ट ने सुद्धोवाला जेल से चिट्ठी लिखकर पुलिस पर उन्हें जबरन मुजरिम बनाकर सलाखों के पीछे भेजने का आरोप लगाया है। आज उनसे मिलने जब जेल में उनके परिचित पहुंचे तो उन्होंने एक चिट्ठी लिखकर उपलब्ध कराई, जिसमें उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए विस्तार से बताया है कि जिस 28 दिसंबर को और ऋषिकेश में पुलिस और जनता के बीच झड़प हुई, उस दिन वे गंगा भोगपुर के वनंत्रा रिजोर्ट पर आक्रोश रैली में शामिल होकर शाम को श्यामपुर स्थित अपने घर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और जब वह इसकी रिपोर्ट लिखाने थाना पहुंचे तो उन्हें बेवजह गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उन्होंने भारतीय संविधान व न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा है कि वह बेकसूर है और उन्हें जल्दी ही न्याय मिलेगा।

आप भी पढ़िए पूर्व सैनिक सुदेश भट्ट की जेल से लिखी चिट्ठी

आप सबको नव वर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं मैं सुदेश भट्ट पूर्व सैनिक की ओर से आप सभी मूल निवासियों को सुद्धोवाला जेल से सादर प्रणाम प्रेषित करता हूं। आप सबको सूचित करना चाहता हूं कि ऋषिकेश पुलिस द्वारा मुझे बिना मतलब के गिरफ्तार कर जेल डाला गया, जिन्हें मैं बिंदुवार आपके समक्ष उपलब्ध कराने जा रहा हूं।

1. जिस दिन यानी 28-12-2025 को ऋषिकेश में पुलिस और जनता के बीच झड़प हुई, उस दिन मैं मूल निवास भू कानून समन्वय समिति के आव्हान पर सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक यमकेश्वर विधानसभा की गंगा भोगपुर की उस वनंत्रा रिजोर्ट पर आक्रोश रैली में शामिल था, जहां अंकिता भंडारी की हत्या हुई और उस कार्यक्रम के दौरान अखबार में मेरा नाम दर्ज भी है व वरिष्ठ पत्रकार श्री हरीश तिवारी जी के पोर्टल न्यूज़ पर मुझे आप वनंत्रा में पुलिस के बीच देख सकते हैं।
2. साथियों जब मैं उक्त कार्यक्रम से लौटकर अपने निवास श्यामपुर लौट रहा था तो गुमानीवाला फाटक के पास लगभग 4:30 से 4:45 के बीच पहुंचा, जहां काफी जाम लगा था। मैंने गाड़ी साइड लगाकर वहां से आगे जाकर देखना चाहा कि आगे की स्थिति क्या है। इतने में मैंने देखा आगे पूरी सड़क जाम है तो मैं गाड़ी वापस मोड़ने के लिए जैसे ही गाड़ी के पास जाना चाहा, अचानक पीछे से गाली देता हुआ एक पुलिसकर्मी ने मुझ पर लगातार लाठियों से प्रहार किया, जिससे मैं जख्मी हुआ और मैं दर्द से पीड़ित रहा और मैं तत्काल अपना मेडिकल कराने ऋषिकेश चिकित्सालय पहुंचा। मेरे साथ मौके पर स्थानीय पत्रकार सूरज राज मौजूद थे, जो मुझे अपनी स्कूटी में घटनास्थल से अस्पताल लाए और चिकित्सा जांच में डॉक्टर ने भी डंडे की प्रहार की पुष्टिकरण की। मैं मेडिकल रिपोर्ट के साथ प्रार्थना पत्र लेकर तत्काल थाना ऋषिकेश पहुंचा और मुझ पर बिना मतलब लाठी भांजने वाले सिपाही के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाना ऋषिकेश पहुंचा। वहां मुझे 2 घंटे तक बैठाने के बाद रात्रि ड्यूटी पर तैनात एसआई एस. दत्त साहब ने कहा कि मैंने कोतवाल भट्ट जी से बात कर ली है। अभी पुलिस व्यस्त है, इसलिए सुबह 10 बजे पहुंचना, आपकी रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
साथियों जैसे ही मैं पुलिस के कहे अनुसार सुबह 10:00 बजे थाना पहुंचा, कोतवाल केसी भट्ट मिले, पूछा तुम कौन हो, मैंने पूरा प्रकरण बताया। इतने में ही कोतवाल कैलाश भट्ट मुझ पर आग बबूला होते हुए बोले कि मैं कराता हूं रिपोर्ट व सिखाता हूं तुझे कि पुलिस के खिलाफ कैसे रिपोर्ट दर्ज की जाती है और मेरा गला पकड़ कर मुझे अंदर खींचकर ले गया और वहां उपस्थित पुलिस वालों को बोला कि इसको सिखा दो क्या होता है पुलिस के खिलाफ रिपोर्ट करना और मेरा सारा सामान, दो मोबाइल, पैसा, बेल्ट, गाड़ी की चाबी, मेरा चश्मा तक सब जप्त कर मुझे जबरन हवालात में डाल दिया गया, जबकि मैं पूरी तरह बेकसूर हूं।
मैं अपने इस वक्तव्य के साथ स्पष्ट करना चाहता हूं कि यदि मैं कहीं भी दोषी हूं और मेरे खिलाफ पत्थरबाजी का एक भी प्रमाण पुलिस के पास उपलब्ध है, मैं माननीय कोर्ट से गुजारिश करूंगा, जो सजा दोगे, वो मुझे स्वीकार है, लेकिन एक भी गुनाह को पुलिस द्वारा जिस तरह जबरन मुजरिम बनाकर संगीत धाराओं में जबरन आरोपी बनाया गया, उससे मैं अत्यधिक व्यथित हूं।
मैं न्याय की गुहार लेकर जिस पुलिस की चौखट पर गया, उसी ने मुझे गुनहगार साबित कर जेल की सलाखों में भेज दिया। यदि मैं अपराधी होता तो स्वयं ही क्यों थाने जाता! अन्य मुजरिमों की तरह मैं भी भागता छुप रहा होता। मुझे भारतीय संविधान व न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है कि मुझे जल्दी न्याय मिलेगा।
3. मेरी चोट का प्रमाण मेरे द्वारा कराए गए मेडिकल, पुलिस द्वारा कराए गए मेडिकल और जेल पहुंचने पर जेल द्वारा किए गए मेडिकल जांच में भी उपलब्ध है। और मैं इसी चोट को लेकर, जो मुझे बिना मतलब बेकसूर होने के बाद भी पुलिस द्वारा पहुंचाई गई, मैं उसी का न्याय मांगने बड़ी उम्मीद के साथ पुलिस के पांच पहुंचा, जिसका नतीजा अपना जीवन देश के लिए समर्पित करने वाले मुझ जैसे सिपाही को जेल की सलाखों के रूप में मिली।
असली पत्थरबाज आज भी नदारद हैं, जिनकी फोटो 30-12-25 के दैनिक जागरण में छपा हुआ है, लेकिन आम जन के बीच सेवा करने वाले जनसेवकों को बेमतलब गिरफ्तार कर पुलिस जबरन मुजरिम बनाने का प्रयास कर रही है। पुलिस की इस नाइन्साफी के खिलाफ मैंने जेल में खाना बंद कर दिया है।
–  प्रार्थी आपका अपना सेवक पूर्व सैनिक सुदेश भट्ट

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बता दें कि सुदेश भट्ट हमेशा जन सरोकारों के लिए क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं। अब देखना यह होगा कि उन्हें कब तक न्याय मिल पाता है!

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