UOU की शोध कार्यशाला में सामाजिक अनुसंधान की प्रविधियों पर हुई चर्चा
देहरादून/मुख्यधारा
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन शोध और अनुसंधान के विभिन्न महत्वपूर्ण आयामों पर चर्चा की गई। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग (MAJMC) के कार्यक्रम समन्वयक (Program Coordinator) प्रोफेसर राकेश चंद्र रायल के कुशल निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को शोध की बारीकियों से परिचित कराया गया।
आज के सत्र की मुख्य वक्ता डॉ. पूजा डबास ने ‘सामाजिक अनुसंधान’ (Social Research) विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि सामाजिक शोध का मुख्य केंद्र बिंदु समाज ही होता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एक सटीक शोध के लिए प्राथमिक (Primary) और द्वितीयक (Secondary) दोनों प्रकार के डेटा का सही संतुलन और महत्व समझना अनिवार्य है।

कार्यशाला के दौरान ‘सिनोप्सिस’ (Synopsis) यानी ‘अनुसंधान प्रस्ताव’ (Research Proposal) तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को क्रमबद्ध तरीके से समझाया गया। डॉ. डबास ने विषय के चुनाव (Topic Selection) से लेकर रिसर्च गैप (Research Gap) की पहचान, परिकल्पना (Hypothesis), और निष्कर्ष तक पहुँचने के वैज्ञानिक चरणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। सत्र में गुणात्मक (Qualitative) और मात्रात्मक (Quantitative) शोध के साथ-साथ सैंपलिंग (Sampling) की विभिन्न विधियों जैसे—सिस्टमैटिक, क्लस्टर, स्नोबॉल और कोटा सैंपलिंग—पर प्रयोगात्मक चर्चा की गई।
कार्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर राकेश चंद्र रायल ने शोध की महत्ता बताते हुए छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने शोध कार्यों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं। इस अवसर पर विभाग के सदस्य और शोधार्थी उपस्थित रहे।


