अराजकता का माहौल : नेपाल में सेना ने संभाली कमान, पड़ोसी राष्ट्र की बर्बादी के लिए ओली सरकार जिम्मेदार, प्रदर्शनकारियों का आंदोलन जारी
मुख्यधारा डेस्क
नेपाल इस समय भीषण राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। हालात काबू से बाहर होने के बाद सेना ने देश की कमान अपने हाथों में ले ली है। सड़कों पर हिंसा, प्रदर्शन और अराजकता का माहौल है। विपक्ष और आम जनता, दोनों ही इस अव्यवस्था के लिए पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। पड़ोसी राष्ट्र में गहराते इस संकट ने न सिर्फ नेपाल की स्थिरता को खतरे में डाल दिया है। नेपाल में यह आंदोलन अब केवल भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह गुस्सा सत्ता वर्ग और राजनीतिक नेतृत्व के खिलाफ आम जनता के अविश्वास और आक्रोश का प्रतीक बन चुका है। स्थिति इतनी भयावह है कि देश की राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक ढांचे पर भी सवाल उठने लगे हैं। नेपाल में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी आंदोलन का आज तीसरा दिन है। हिंसक प्रदर्शन रोकने के लिए सेना ने मंगलवार रात 10 बजे से पूरे देश का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया है।

नेपाली सेना ने कहा कि मुश्किल समय का फायदा उठाकर कुछ उपद्रवी आम लोगों और सरकारी प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। लूटपाट और आग लगाने जैसी हरकतें हो रही हैं। ऐसी गतिविधियां बंद कर दें।प्रदर्शनकारियों का गुस्सा देखते हुए केपी शर्मा ओली ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर काठमांडू छोड़ दिया है। इससे पहले आंदोलनकारियों ने केपी ओली के निजी घर, राष्ट्रपति भवन और सुप्रीम कोर्ट में आग लगा दी। राजधानी काठमांडू और आसपास के इलाकों में झड़पों और आगजनी में अब तक 22 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल हैं। आंदोलनकारियों ने कल नेपाल के 3 प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, झालानाथ खलान और पुष्प कमल दहल प्रचंड के घर में आग लगा दी। पूर्व पीएम झालानाथ खनाल के घर में आग लगाने से उनकी पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार गंभीर रूप से जल गईं। उन्हें तुरंत कीर्तिपुर बर्न अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को उनके घर में घुसकर पीटा, जबकि वित्त मंत्री विष्णु पौडेल को काठमांडू में उनके घर के पास दौड़ा-दौड़ाकर मारा।सेना ने बयान जारी कर कहा कि देश में कानून-व्यवस्था चरमराई हुई है और कुछ उपद्रवी इस कठिन समय का फायदा उठाकर आम लोगों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। लूटपाट और आगजनी जैसी घटनाओं को तुरंत बंद करने की चेतावनी सेना ने दी। नेपाल में आज राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल की मौजूदगी में नेपाल सेना और प्रदर्शनकारी युवाओं के बीच औपचारिक बातचीत होगी। हालांकि, अभी इसका समय तय नहीं किया गया है। इसका मकसद आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म करना है। मंगलवार रात को राष्ट्रपति भवन, शीतल निवास में युवा प्रतिनिधियों और सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल के बीच अनौपचारिक बातचीत हुई थी। इसके बाद आज सुबह से औपचारिक बातचीत की तैयारी की गई है।
नेपाल में जारी राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर भारत पर भी दिखाई दे रहा
नेपाल में जारी भीषण आंदोलन और राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर भारत पर भी पड़ रहा है। पड़ोसी मुल्क की सड़कों पर फैली हिंसा और सेना का कब्जा सिर्फ काठमांडू तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भारत-नेपाल के रिश्तों, सीमा पार सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों पर भी गहराने लगा है। नेपाल में हिंसा और अस्थिरता को देखते हुए भारत ने उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और सिक्किम से लगी खुली सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी है। आशंका है कि हालात और बिगड़ने पर नेपाल से बड़ी संख्या में लोग भारत की ओर पलायन कर सकते हैं। ऐसे में सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। लेकिन अशांति के कारण काठमांडू सहित कई शहरों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो गई है। भारत से पेट्रोलियम पदार्थ, दवाइयां और खाद्यान्न की सप्लाई धीमी पड़ने लगी है। अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो नेपाल ही नहीं, भारत के सीमावर्ती जिलों पर भी इसका आर्थिक असर दिख सकता है। नेपाल में रह रहे भारतीय नागरिक और कारोबारी भी असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। भारतीय दूतावास ने नागरिकों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से यात्रा न करने की अपील की है।


