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जौनसारी बोउरी बाल कवि सम्मेलन में गूंजी लोकभाषा की मिठास, बच्चों ने संस्कृति संरक्षण का दिया संदेश

Mukhyadhara
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  • जौनसारी बोउरी बाल कवि सम्मेलन में गूंजी लोकभाषा की मिठास, बच्चों ने संस्कृति संरक्षण का दिया संदेश

नीरज उत्तराखंडी/त्यूणी

त्यूणी स्थित पंडित शिवराम राजकीय महाविद्यालय में आखर लोक बोली भाषा समिति के तत्वावधान में आयोजित जौनसारी बोउरी बाल कवि सम्मेलन लोकभाषा और सांस्कृतिक चेतना का अनूठा संगम बन गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं और बाल प्रतिभाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए जौनसारी बोली में कविता पाठ कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। सम्मेलन का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना रहा।

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कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने जौनसारी बोउरी भाषा में सामाजिक सरोकार, प्रकृति, पारंपरिक जीवनशैली, परिवार, गांव की संस्कृति और लोक मूल्यों पर आधारित कविताएं प्रस्तुत कीं। मंच पर बच्चों की प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को भावुक और उत्साहित दोनों किया। लोकभाषा में कविता पाठ के माध्यम से बच्चों ने यह संदेश दिया कि अपनी भाषा और संस्कृति की पहचान को बचाए रखना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

सम्मेलन में प्रतिभागियों का उत्साह देखने योग्य रहा। निर्णायक मंडल द्वारा कविता प्रस्तुति, उच्चारण, भावाभिव्यक्ति और विषयवस्तु के आधार पर प्रतिभाओं का मूल्यांकन किया गया। प्रतियोगिता में तनु वर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि अनुराधा द्वितीय और आरुषि नेगी तृतीय स्थान पर रहीं। विजेता प्रतिभाओं को आखर लोक बोली भाषा समिति की ओर से प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि लोकभाषाएं किसी भी समाज की सांस्कृतिक पहचान होती हैं और इनके संरक्षण में बच्चों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

विशेष रूप से प्रथम स्थान प्राप्त प्रतिभागी को आगामी कविता सम्मेलन में मंच साझा करने और कविता पाठ करने का अवसर दिए जाने की घोषणा की गई, जिससे प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

कार्यक्रम में स्थानीय बुद्धिजीवी, शिक्षक, अभिभावक और साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही। पूरे आयोजन में लोकभाषा और सांस्कृतिक संरक्षण को लेकर उत्साह का माहौल देखने को मिला। सम्मेलन ने यह साबित किया कि नई पीढ़ी अपनी भाषा और परंपराओं के प्रति जागरूक है और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध भी।

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