भालुओं का बढ़ता आतंक : सेब बागानों में तबाही, वनकर्मी पर हमला

Mukhyadhara
IMG 20260921 WA0001
  • भालुओं का बढ़ता आतंक : सेब बागानों में तबाही, वनकर्मी पर हमला
  • मसरी-भीतरी-सदना में सेब के पेड़ तोड़कर फसल चौपट, नटीण गांव में वनकर्मी गंभीर घायल
  • पार्क प्रशासन से बागवानों ने मुआवजे और घेरबाड़ की मांग की, हर साल नुकसान के बावजूद स्थायी समाधान का इंतजार

नीरज उत्तराखंडी/उत्तरकाशी

उत्तरकाशी जिले के मोरी और भटवाड़ी क्षेत्र में भालुओं का आतंक लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर गोविंद पशु विहार एवं राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र की रूपिन रेंज में भालू सेब बागानों को नुकसान पहुंचाकर तैयार होती फसल चौपट कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भटवाड़ी के नटीण गांव में भालू ने वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। लगातार सामने आ रही घटनाओं से ग्रामीणों और बागवानों में दहशत का माहौल है।

सेब के पेड़ों की टहनियां तोड़कर फसल बर्बाद

मोरी विकासखंड के गोविंद पशु विहार पार्क क्षेत्र की रूपिन रेंज के मसरी, भीतरी और सदना तोक में भालुओं ने सेब बागानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। सेब की फसल तैयार होने के समय भालू बागानों में घुसकर पेड़ों की टहनियां तोड़ रहे हैं और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के साथ तैयार फसल भी बर्बाद कर रहे हैं।

भीतरी क्षेत्र के काश्तकार जगदीश कुंवर के अनुसार फते पर्वत के मसरी, भीतरी और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों सेब की फसल तैयार हो रही है। ऐसे समय में भालुओं के लगातार बागानों में पहुंचने से बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

बागवानों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। प्रत्येक सेब सीजन में भालुओं के बागानों में घुसने और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आती हैं। कई वर्षों से क्षेत्र के काश्तकार पार्क प्रशासन से बागानों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ कराने की मांग करते आ रहे हैं और इसके लिए प्रस्ताव भी भेजे गए हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था की मांग

काश्तकारों का कहना है कि एक तरफ जंगली जानवर उनकी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, दूसरी तरफ नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें पर्याप्त मुआवजा भी नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने पार्क प्रशासन से प्रभावित बागानों का स्थलीय निरीक्षण कर क्षति का आकलन कराने तथा नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है।

बागवानों ने भालुओं की आवाजाही रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में प्रभावी घेरबाड़ कराने की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि केवल सीजन के दौरान अस्थायी उपाय करने के बजाय बागानों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था जरूरी है।

गोविंद पशु विहार पार्क की उप निदेशक निधि सेमवाल ने बताया कि भालुओं द्वारा फसलों और सेब उद्यानों को होने वाले नुकसान के मुआवजे को लेकर नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने बताया कि भालुओं को बागानों से दूर रखने के लिए क्षेत्र में सोलर एवं अन्य निर्धारित उपकरण भी हर वर्ष लगाए जाते हैं।

नटीण में वनकर्मी पर भालू का हमला

इधर, भटवाड़ी विकासखंड के नटीण गांव में भालू ने वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। घायल की पहचान द्वारी गांव निवासी करीब 55 वर्षीय मंगल सिंह पोखरियाल के रूप में हुई है।

द्वारी गांव के प्रधान सज्जन सिंह नेगी के अनुसार मंगल सिंह नटीण गांव स्थित वन विभाग की नर्सरी में काम करने जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे भालू ने अचानक उन पर हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

मंगल सिंह के शोर मचाने पर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह भालू को वहां से भगाया। घटना की सूचना वन विभाग को देने के बाद ग्रामीण घायल को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भटवाड़ी लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल उत्तरकाशी रेफर किया गया।

बताया गया है कि मंगल सिंह पर इससे पहले भी भालू हमला कर चुका है। लगातार दूसरी बार भालू के हमले का शिकार होने से क्षेत्र में वन्यजीवों और मानव आबादी के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है।

फसल से लेकर इंसान तक, बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष

मोरी और भटवाड़ी की घटनाएं केवल फसल नुकसान या एक व्यक्ति पर हमले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर सामने रखती हैं। बागवानों के अनुसार भालू सेब और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि जंगली सूअर गेहूं और आलू की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। काश्तकारों ने प्रशासन और पार्क प्रबंधन से नुकसान का पारदर्शी आकलन, समयबद्ध मुआवजा तथा संवेदनशील गांवों और बागानों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह भी पढ़े