- एनडीए की अप्रत्याशित जीत : जानिए किस पार्टी को कितनी सीटें मिली, क्या-क्या नए रिकॉर्ड बने और कौन प्रत्याशी बड़े अंतर से जीता
मुख्यधारा डेस्क
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने अप्रत्याशित जीत दर्ज की, जिसमें कई दिग्गज हार गए। महागठबंधन को करारी शिकस्त मिली। खेसारी लाल यादव जैसे चर्चित चेहरे हारे, वहीं मैथिली ठाकुर ने रिकॉर्ड बनाया। एनडीए की जीत के पीछे महिला रोजगार योजना और पेंशन वृद्धि जैसे कई कारण रहे, जबकि महागठबंधन नेतृत्व की कमी और कमजोर संगठन के कारण विफल रहा।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम आ गये हैं। भारतीय जनता पार्टी ने सबसे ज्यादा 89 सीटें जीती हैं। इसके बाद जदयू को सबसे ज्यादा सीटें मिलीं हैं। जदयू ने 85, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने 19 और जीतन राम मांझी की पार्टी हम ने 5 सीटें जीतीं हैं। इसके साथ ही तय हो गया कि बिहार में एक बार एनडीए की ही सरकार बनेगी। सत्तारूढ़ गठबंधन ने इस बार 200 से अधिक सीटें जीतीं हैं और विपक्ष बेहद कमजोर रह गया है।
सबसे ज्यादा नुकसान राष्ट्रीय जनता दल को हुआ है। उसके मात्र 25 उम्मीदवार ही जीत दर्ज कर पाये हैं। कांगेस भी 6 सीटों पर सिमट गयी है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने वर्ष 2020 की तरह बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भी 5 सीटों पर जीत दर्ज की है। अन्य दलों के हिस्से में 9 सीटें गयीं हैं। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर, जो लगातार तीन साल से बिहार में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे, उनकी पार्टी का कोई उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर सका।
वहीं, महागठबंधन का हिस्सा बने सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी के भी इस चुनाव में हाथ खाली रह गये।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रिकॉर्ड
- सबसे बड़ी जीत : 73,572 मतों से रुपौली से जदयू के कलाधर मंडल ने बीमा भारती को हराकर दर्ज की।
- सबसे छोटी जीत : 27 मतों से आरा जिले के संदेश में जदयू प्रत्याशी राधाचरण साह ने दर्ज की।
- सबसे कम उम्र की विधायक : अलीनगर से जीत दर्ज करने वालीं मैथिली ठाकुर अभी 25 वर्ष की हैं।
- सबसे उम्रदराज विधायक : जदयू विधायक हरिनारायण सिंह व बिजेन्द्र यादव की उम्र 79 वर्ष है।
चर्चित चेहरों की जीत
- तारापुर में उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राजद के अरुण कुमार को 45843 मतों से हराया।
- तेजस्वी यादव राघोपुर से किसी तरह भाजपा के सतीश कुमार से 14532 मतों से जीते।
- स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने पूर्व विस अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी को 9370 मतों से दी मात।
- मंत्री विजय कुमार चौधरी सरायरंजन में फिर से परचम लहराने में सफल रहे, राजद को हराया।
इन चेहरों की हार ने चौंकाया
- निर्दलीय जीतकर मंत्री बने सुमित कुमार सिंह चकाई सीट से हारे। अन्य सभी मंत्री जीते।
- कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम कुटुंबा सीट बचाने में असफल रहे। हम के प्रत्याशी ने हराया।
- भोजपुरी फिल्म स्टार खेसारी लाल यादव छपरा सीट से भाजपा प्रत्याशी से चुनाव हारे।
- राजद से निष्कासित तेज प्रताप यादव पार्टी बनाकर महुआ से चुनाव लड़े व तीसरे स्थान पर रहे।
बिहार चुनाव में राजग की जीत के मंत्र
- मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना प्रमुख कारण रहा। महिलाओं के बीच नीतीश कुमार के प्रति सकारात्मक धारणा उनके लिए कैडर वोट की तरह दिखी।
- वृद्धजन पेंशन योजना की राशि 400 से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दी गई।
- घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली की सुविधा ने सुगम की राह।
- पीएम नरेन्द्र मोदी ने मंच से जब तेजस्वी के आने पर कट्टा वाले आडियो-वीडियो की बात की तो वोटरों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा।
- नीतीश कुमार के सुशासन और विकास के एजेंडे पर भरोसे ने राजग की झोली वोटों से भर दी।
इसलिए हारा महागठबंधन
- नेतृत्व का अस्थिर ढांचा रहा। राजद और कांग्रेस के बीच नेतृत्व, समन्वय और चेहरे को लेकर उत्पन्न विवाद ने गलत प्रभाव डाला।
- जातीय व सामाजिक समीकरणों के आकलन में चूक हुई। महिलाओं, युवाओं और गैर-परंपरागत जातीय समूहों में पकड़ नहीं बना सका।
- कांग्रेस बोझ साबित हुई। टिकट वितरण को लेकर भारी नाराजगी थी।
- चुनावी एजेंडा तय करने में असफल रहा, महागठबंधन की आवाज मतदाताओं तक बिखरी हुई और अस्पष्ट पहुंची।
- स्थानीय स्तर पर संगठन की निष्क्रियता बड़ी समस्या साबित हुई।


