NEET-UG Exam : 'ग्रेस मार्क्‍स' देने में गड़बड़ी हुई ! परीक्षार्थियों को सुप्रीम कोर्ट से थोड़ी राहत, 1563 स्टूडेंट्स की दोबारा होगी परीक्षा - Mukhyadhara

NEET-UG Exam : ‘ग्रेस मार्क्‍स’ देने में गड़बड़ी हुई ! परीक्षार्थियों को सुप्रीम कोर्ट से थोड़ी राहत, 1563 स्टूडेंट्स की दोबारा होगी परीक्षा

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NEET-UG Exam : ‘ग्रेस मार्क्‍स’ देने में गड़बड़ी हुई ! परीक्षार्थियों को सुप्रीम कोर्ट से थोड़ी राहत, 1563 स्टूडेंट्स की दोबारा होगी परीक्षा

मुख्यधारा डेस्क

नीट प्रवेश परीक्षा में हुई धांधली को लेकर पूरे देश भर में मामला गर्माया हुआ है। नीट परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों में भारी आक्रोश बरकरार है। मेडिकल स्टूडेंट्स अभी भी पेपर लीक को लेकर एनटीए पर सवाल उठा रहे हैं।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी अभी तक दो बार सुनवाई कर चुका है। गुरुवार, 13 जून को दूसरी बार सर्वोच्च अदालत ने ‘ग्रेस मार्क्‍स’ के मुद्दे पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट में डाली गई याचिकाओं में तीन प्रमुख मांगें थी। जिसमें परीक्षा में शामिल 1563 स्टूडेंट्स को ग्रेस मार्क्स दिए गए जो गलत है। मौजूदा रिजल्ट के बेस पर हो रही काउंसलिंग को रोका जाए। नीट परीक्षा रद की जाए और एग्जाम दोबारा कराया जाए। लेकिन सच यह भी है कि ग्रेस मार्क्स दिए जाने में परीक्षा नियंत्रक संस्था (एनटीए) से गड़बड़ी हुई है। किस हड़बड़ी में यह गड़बड़ी हुई, यह तो संस्था ही जाने। यही वजह है कि साढ़े छह सौ मार्क्स लाने वाले जिन विद्यार्थियों का पहले सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन आसानी से हो जाता था उनकी रैंक इस बार पचास हज़ार से भी ऊपर चली गई। कोर्ट में सुनवाई के बाद कुछ शांति मिली है। अब ग्रेस मार्क्स पाने वाले स्टूडेंट्स की दोबारा परीक्षा होनी है। हो सकता है इससे उन स्टूडेंट्स के साथ न्याय हो पाए जो बिना किसी ग्रेस मार्क्स के अच्छे नंबर लाए हैं। हालांकि पूरी परीक्षा को ही रद्द करके दोबारा कराने वाली याचिकाओं पर कोई निर्णय नहीं हो सका है क्योंकि सरकार का कहना है कि पेपर लीक होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं।

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बात केवल ग्रेस मार्क्स की ही नहीं है। एक ही सेंटर से परीक्षा देने वाले कई बच्चों का टॉपर होना भी शक तो पैदा कर ही रहा है। परीक्षा में शामिल होने वाले कई बच्चे भी यही सवाल उठा रहे हैं, वहीं गुरुवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बेशक ग्रेस मार्क्स वाले 1563 अभ्यार्थियों के एग्जाम दोबारा कराने के लिए कहा है।

नीट परीक्षा में पेपर लीक का कोई सबूत नहीं मिला है। 1563 बच्चों की दोबारा परीक्षा के लिए कोर्ट ने जो तरीका सुझाया है, उसके मुताबिक ही काम होगा और हम कोर्ट के आदेश को स्वीकार करते हैं। एनटीए में भ्रष्टाचार नहीं मिला है। यह बहुत विश्वसनीय निकाय है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट मामले पर सुनवाई कर रहा है और हम उनका आदेश मानेंगे। हम ये सुनिश्चित करेंगे कि किसी छात्र को नुकसान न हो। सरकार कोर्ट में जवाब देने के लिए तैयार है।

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इस मुद्दे पर सरकार ने शिक्षण क्षेत्र से जुड़े लोगों की एक समिति बनाई है। इस समिति की रिपोर्ट को कोर्ट में पेश किया जाएगा। एनटीए ने देश में तीन बड़ी परीक्षाएं नीट, जेईई और सीयूईटी सफलतापूर्वक आयोजित कराई हैं। घटना में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

दरअसल, 5 मई को हुई नीट परीक्षा में बिहार पुलिस ने पेपर लीक मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था, इसके बाद जांच हुई और उसमें सामने आया कि 5 मई की परीक्षा से पहले लगभग 35 उम्मीदवारों को NEET-UG के प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन अभी तक इस मामले में सख्त एक्शन नहीं लिया गया और ना ही एनटीए की तरफ से कोई जवाब सामने आया है। छात्रों का कहना है कि NEET परीक्षा में शुरू से ही गड़बड़ी है। पेपर लीक को लेकर छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था लेकिन परीक्षा को नहीं रोका गया।

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री-एग्जाम के फैसले के बाद छात्रों का गुस्सा और भी ज्यादा फूट रहा है। उनका कहना है कि एनटीए ने अपनी गलती छुपाने के लिए यह किया, इससे 23 लाख छात्रों का इंसाफ नहीं मिला है। इसमें पूरे देश से करीब 24 लाख से ज्यादा कैंडिडेट शामिल हुए। बिहार में NEET की परीक्षा में सॉल्वर गैंग के 19 लोग गिरफ्तार हुए। पटना पुलिस ने 14 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें 4 मेडिकल स्टूडेंट थे। वहीं, पूर्णिया से भी 4 लोगों की गिरफ्तारी हुई। सभी मेडिकल स्टूडेंट थे। इसके साथ ही गोपालगंज पुलिस ने भी एक छात्र को गिरफ्तार किया था। पूर्णिया में नीट परीक्षा के दौरान पेपर लिखते 4 आरोपी पकड़े गए थे। ये डमी कैंडिडेट दूसरे की जगह परीक्षा दे रहे थे।

पुलिस पूछताछ में सभी ने बताया कि 20 लाख में उनकी डील तय हुई थी। पेपर पूरा होने के बाद सभी को 5 लाख प्रति कैंडिडेट मिलने थे। पेपर लीक के आरोप की याचिका पर 8 जुलाई को सुनवाई होगी। लेकिन फिलहाल मेडिकल परीक्षा देने वाले छत्र-छात्राओं में गुस्सा बरकरार है। इसका बड़ा कारण यह है कि विश्वविद्यालयों और संस्थानों में दाखिला लेने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है दूसरी ओर अभी मामले में पूरी तरह से निपटारा नहीं हो पाया है। ‌

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