Image

जुनून या लत: सोशल मीडिया के प्रति यह कैसा जुनून जिसमें जान भी चली जाए, नेपाल में युवाओं के विद्रोह के आगे सरकार तो झुकी लेकिन सवाल भी छोड़ गई

admin
s 1 5

जुनून या लत: सोशल मीडिया के प्रति यह कैसा जुनून जिसमें जान भी चली जाए, नेपाल में युवाओं के विद्रोह के आगे सरकार तो झुकी लेकिन सवाल भी छोड़ गई

शंभू नाथ गौतम

सोमवार, 8 सितंबर साल 2025 को नेपाल में एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे विश्व को हिला कर रख दिया। नेपाल के लाखों की संख्या में युवा वर्ग राजधानी काठमांडू में सरकार के लगाए गए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ सड़क पर उतर आए। सोशल मीडिया को दोबारा शुरू करने की ऐसी दीवानगी कि जिसमें जान की भी युवाओं ने परवाह नहीं की। आखिरकार 19 युवाओं की मौत हो गई और तीन सौ से ज्यादा घायल हो गए। सोशल मीडिया को दोबारा शुरू करने के लिए नेपाल में युवा वर्ग गोली खाने को तैयार हो गए। अपनी जान की भी परवाह नहीं की। राजधानी में आगजनी और हिंसक की जो घटनाओं की तस्वीरें आईं वह पूरे विश्व के लिए बहुत डरावनी थी। इस हिंसक घटना में कई ऐसे युवाओं की जान चली गई जिनकी आयु 15 से 20 वर्ष के बीच में थी।

युवाओं के विद्रोह और आक्रोश को देखते हुए आखिरकार नेपाल की सरकार को झुकना पड़ा और सोशल मीडिया को फिर से शुरू कर दिया गया है। लेकिन युवाओं का यह विद्रोह भरा आंदोलन दूसरे देशों को भी सीख दे गया। यह घटना बताती है कि आज युवा वर्ग में सोशल मीडिया के प्रति किस कदर दीवानगी है कि वह जान देने के लिए भी तैयार हैं। हिंसा घटना के दूसरे दिन यानी आज मंगलवार को भी नेपाल में तनावपूर्ण माहौल है। राजधानी काठमांडू समेत कई जिलों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। भारी संख्या में पुलिस और सेना के जवान तैनात हैं । काठमांडू और आसपास के जिलों में सोमवार को हुए प्रदर्शन के बाद अब अस्पतालों में अफरातफरी का माहौल है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 300 से ज्यादा घायल युवाओं का इलाज राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। कई की हालत नाजुक बताई जा रही है।

डॉक्टरों ने बताया कि अधिकतर युवाओं को गोली लगने, पत्थरबाजी और भगदड़ से गंभीर चोटें आई हैं। नेपाल सरकार ने युवाओं के भारी विरोध के बाद सोमवार देर रात सोशल मीडिया से बैन हटा लिया है। कैबिनेट बैठक के बाद संचार मंत्री पृथ्वी गुरुंग ने कहा कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों की बात मान ली हैं। हमने सोशल मीडिया ओपन कर दिया है। युवा अब विरोध बंद कर दें। इससे पहले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से रोक हटाने से इनकार कर दिया था। इस प्रदर्शन की अगुआई Gen-Z यानी 18 से 28 साल के युवाओं ने की थी। सोमवार को इस विरोध-प्रदर्शन में 19 लोग मारे गए थे, जबकि 300 से ज्यादा घायल हुए थे। सरकार ने अंततः सोशल मीडिया पर लगी रोक को हटाने की घोषणा कर दी। हालांकि, इस फैसले के बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। कई जगहों पर कर्फ्यू जैसी स्थिति है और सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। यूएन मानवाधिकार ऑफिस ने भी इस हिंसा पर दुख जाहिर की है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

युवाओं का यह आंदोलन इस बात की गवाही देता है कि नेपाल का युवा वर्ग सोशल मीडिया को अपनी अभिव्यक्ति और स्वतंत्रता का अहम जरिया मानता है। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या सोशल मीडिया के प्रति यह दीवानगी अब खतरनाक लत का रूप ले चुकी है? यह घटना केवल नेपाल ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए सबक है कि युवा वर्ग को डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल जिम्मेदारी और संतुलन के साथ करना चाहिए। सरकारें भी मनमाने प्रतिबंध लगाने के बजाय संवाद और समाधान की राह अपनाएं, ताकि स्थिति हिंसा और खूनखराबे तक न पहुंचे।

Next Post

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने काशीपुर में प्रबुद्धजन सम्मेलन में किया प्रतिभाग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने काशीपुर में प्रबुद्धजन सम्मेलन में किया प्रतिभाग राज्य सरकार की उपलब्धियां एवं विकास योजनाओं की दी जानकारी, जनसंवाद से जुड़े, विकास में जनसहभागिता पर दिया बल काशीपुर / मुख्यधारा  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने काशीपुर […]
kk

यह भी पढ़े