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फिर उठी पुरोला को पृथक जनपद बनाने की मांग, 30 मार्च तक मांग पूरी न होने पर दी व्यापक आंदोलन की चेतावनी

admin
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  • फिर उठी पुरोला को पृथक जनपद बनाने की मांग
  • 30 मार्च तक मांग पूरी न होने पर दी व्यापक आंदोलन की चेतावनी
  • खेल मैदान में हुआ महापंचायत का आयोजन
  • पृथक रवांई जनपद संघर्ष समिति का किया गया गठन
  • तहसील प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
  • 30 मार्च तक मांग पूरी न होने पर दी व्यापक आंदोलन की चेतावनी

नीरज उत्तराखंडी/पुरोला

पिछले कई वर्षों से रवांई घाटी का जनमानस विषम भौगोलिक परिस्थिति के कारण निरन्तर जनपद की मांग कर रहा है।
मुख्यमंत्री को प्रेरित ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ० रमेश पोखरियाल निशंक ने 15 अगस्त को उत्तराखण्ड में चार जनपदों को बनाने की घोषणा की थी। जिसमें रवाई जनपद पुरोला बनना निश्चित था। लेकिन राजनीतिक षड़यंत्रों के कारण पुरोला जिले का नाम हटा दिया गया। उसके स्थान पर यमुनोत्री जनपद की घोषणा हो गयी थी।

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विदित है कि चारों जनपदों के नामों को परिवर्तित करने के कारण सम्पूर्ण उत्तराखण्ड प्रदेश की जनता ने इसका विरोध किया। जिले की मांग को लेकर पुरोला की जनता ने 33 दिनों तक लगातार आन्दोलन और धरना प्रदर्शन किया, परिणामस्वरूप तत्कालीन मुख्यमंत्री को पद से हटना पड़ा। जिसके परिणाम स्वरूप चारों जनपद अस्तित्व में नहीं आ पाये।

वहीं वर्ष 2014 में मांग पूरी न होने के कारण पुनः जनपद की मांग को लेकर रवांई घाटी के जनमानस ने सड़कों में उतर कर रैलियों और धरना प्रदर्शन के माध्यम से जिले की मांग को जोर-शोर से जठाया, लेकिन तत्कालीन सरकार ने जनमानस की इस मांग को नजर अंदाज कर दिया और केवल आश्वसन देकर जनता को शान्त कर दिया।

वर्ष 2016 में रवाई की जनता ने आश्वरान पुरा न करने के कारण पुनः घरना प्रदर्शन किया और 75 दिनों तक दिन-रात कनिक अंशन चलता रहा। फिर एक बार पूर्व की भंति आश्वसन देकर सरकार ने जनमान की भावनाओं का अनादर किया।

वर्ष 2018 में रवांई की जनता को सरकार की वादा खिलाफी के विराध में धरने पर बैठना पड़ा तथा आन्दोलन के लिए बाध्य होना पड़ा। यह आन्दोलन भी 50 दिनों तक दिन-रात चला जिसमें 5 दिनों तक प्रकाश कुमार डबराल ने आमरण अनशन किया। उस समय भी सरकार ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही जनपद पुरोला की घोषणा की जाएगी। जो आज तक भी पूरी नहीं हो पाई है।

वर्ष 2018 के बाद भी हर वर्ष यह मांग उठाई गयी लेकिन 2026 में जबकि हम स्वतंत्रता की रजत जयन्ती मना चुके हैं, लेकिन रवानी के जनमानस की आवाज नहीं सुनी जा रही है।
रवांई का जनमानस इस वादा खिलाफी तथा सरकार की असंवेदनशीलता से हैरत में है कि रवाई के जनमानस की आवाज सरकार को सुनाई क्यों नहीं देती है?

ज्ञापन में, सरकार को उसके बादों की याद दिलाते हुए अनुरोध किया गया है कि रवाई को जनपद उत्तरकाशी से अलग जनपद बनाया जाय।यदि फिर से रवांई की जनता के साथ आश्वासनों के माध्यम से जनमानस की भावनाओं को कुचलने का प्रयास किया गया, तो रवांई की जनता हकों के लिए धरना प्रर्दशन , हड़ताल आमरण अनशन करेगी और वह सब करेगी जिसके लिए सरकार, जनता को बाध्य करेगी। यदि सरकार मार्च तक पृथक जनपद नहीं बनाती है, तो 30 मार्च 2026 से फिर से जनता को आन्दोलन तथा धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी।

महापंचायत व ज्ञापन सौंपने वालों में संघर्ष समिति अध्यक्ष बलदेव असवाल, गंभीर सिंह चौहान, अंकित पंवार, उपेंद्र राणा, मुरारी लाल, चंडी प्रसाद खंडूड़ी, पूर्ण नौटियाल, राजेश विजल्वाण, उमेंद्र रावत, सोहन पोखरियाल, रविंद्र सिंह, दीपक नौडियाल, दिनेश, अरबिंद, जगजीवन राणा, दिनेश प्रसाद भट्ट, भूपाल गुसाईं व मनजीत आर्य सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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