इस बार दिवाली कब मनाएं? 20 अक्टूबर को या 21 अक्टूबर को?
हरिद्वार/मुख्यधारा
हरिद्वार के ज्योतिषाचार्य पं गणेश चन्द्र बिष्टानियाँ (शास्त्री) का कहना है कि इस बार 20-21 अक्टूबर को अमावस्या पड़ रही है. ग्रह नक्षत्रों की गणना के अनुसार 21 अक्टूबर को सूर्य उदय से सूर्यास्त के बाद भी 3/4 पहर अमावस्या मिल रही है. ऐसे में 21 अक्टूबर को ही दिवाली का पूजन करना जिस वर्ष प्रतिपदा का मान अधिक होता है उस दिन अमावस्या और प्रतिपदा युक्त दीपावली होती है। ऐसे में इस बार 21 अक्तूबर को ही दीपावली पूजन किया जाएगा। 21 अक्तूबर को सूर्यास्त (शाम 5:40 बजे) के बाद 2 घंटे 24 मिनट तक किया जा सकता है। ऐसे में लोग रात 8:04 बजे तक पूजन कर सकते हैं। इसमें भी शाम 7:15 बजे से रात8:30 तक चौघड़िया लाभ में लक्ष्मी पूजन किया जा सकता है, जो कि शुभ रहेगा। पंचांग के अनुसार 21 को ही दिवाली
पंडित गणेश जी ने कहा कि संशय के बीच शास्त्राज्ञा अंतिम निर्णय 21 अक्तूबर को ही दीपावली मनाने का निर्णय देता है। धर्मनिष्ठ लोग सूर्यास्त के बाद अल्पकालिक व्याप्त अमावस्या के बावजूद सायंकाल से प्रदोषकाल तक (अर्थात सूर्यास्त से आधा घंटा पहले और सूर्यास्त के बाद लगभग 02 घंटा 24 मिनट तक) की कालावधि में निसंदेह लक्ष्मी पूजन मंगलवार को कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि धर्मसिन्धु, निर्णय सिन्धु, श्री रामदत्तपंचांग भी इसकी अनुमति देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गृहस्थ लोग 21 अक्तूबर को पूजन करेंगे वहीं श्रेष्ठकर रहेगा. *दिपावली पर कैसे करें पूजन?* दिवाली का पूजन वैसे तो सबके लिए लाभकारी है. व्यापारियों के लिए यह दिन खास होता है. इस दिन सबसे पहले गणेश जी का पूजन करना चाहिए. गणेश जी के पूजन से शुभता बनी रहती है. सिर्फ लक्ष्मी जी का पूजन करने से धन संपदा तो मिलती है, लेकिन साथ ही विकार भी उत्पन्न होते हैं. इसलिए सर्वप्रथम गणेश जी का विधि-विधान से पूजन करना करना चाहिए.
मिट्टी या चांदी, किसके लक्ष्मी-गणेश?
पं. गणेश जी ने बताया कि मिट्टी या चांदी के गणेश जी व लक्ष्मी जी की पूजा करें. स्नान आदि कराकर शुद्ध वस्त्र पहनाकर श्रद्धानुसार पूजन करें. खील-खिलौना का प्रसाद उत्तम रहता है. कुछ लोग कलम-दवात और कुबेर जी, काली मां का पूजन भी करते हैं. उन्होंने बताया कि इस समय देश की भी मंगल की दशा चल रही है. अमावस्या और मंगल के शुभ योग से धन संपत्ति की प्राप्ति का सुंदर योग बन रहा है. इसलिए यह दिवाली शुभ फल देनी वाली और श्रेष्ठकर है.


