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सहकारिता में व्यापक सुधार को नियमावलियों में होंगे बदलाव: डॉ. धन सिंह रावत

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सहकारिता में व्यापक सुधार को नियमावलियों में होंगे बदलाव: डॉ. धन सिंह रावत

पांच नवीन सहकारी संस्थाओं की स्थापना को अधिकारियों को दिए निर्देश

देहरादून/मुख्यधारा

उत्तराखंड सहकारिता विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला “सहकार मंथन-2025” के समापन अवसर पर विभागीय मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र में व्यापक सुधार को सहकारी अधिनियम, नियमों में बदलाव किया जायेगा ताकि सहकारी व्यवस्था को भविष्योन्मुखी व पारदर्शी बनाया जा सके।

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डॉ. रावत ने कहा कि उत्तराखंड में सहकारिता अब केवल बैंकिंग तक सीमित न रहकर, एक सामाजिक-आर्थिक आंदोलन बन रही है। इसके लिए पारदर्शिता, तकनीक, और स्थानीय सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 670 पैक्स समितियां हैं, जिनमें 11 लाख सदस्य पंजीकृत है। जबकि 10 जिला सहकारी बैंक व 1 राज्य सहकारी बैंक में 19 लाख खाताधारक हैं। कुल मिलाकर 30 लाख लोग सहकारिता व्यवस्था से जुड़े हैं जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 35 प्रतिशत है

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सुधार के महत्वपूर्ण बिंदु

31 दिसंबर 2025 तक “कोऑपरेटिव ड्राइव” के अंतर्गत 1 लाख नए सदस्य बनाए जाएंगे। इसके साथ ही 1 लाख नए बैंक खाते खोले जाएंगे विभाग में प्रमोशन-ट्रांसफर अब प्रदर्शन आधारित होंगे। सहकारी बैंकों में ट्रांसफर नीति लागू। वर्किंग स्टाइल में बदलाव हेतु निर्देश जारी।

समितियों के पुनर्गठन की शुरुआत

डॉ. रावत ने कहा कि प्रदेश की 6500 सहकारी समितियों में से लगभग 1500 निष्क्रिय हैं। ऐसी समितियों को समाप्त करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। और उनका पुनर्गठन किया जाएगा।

24 जुलाई से हरिद्वार में सुधारात्मक निरीक्षण अभियान की शुरुआतकी जाएगी।

आचार संहिता के बाद अन्य जिलों में सहायक निबंधक उप निबंधक, संयुक्त निबंधक स्तर पर अभियान संचालित किया जायेगा।

प्रथम चरण में हरिद्वार और आचार संहिता के उपरांत सभी जनपदों में सुधार और निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा।

350 प्रोफेशनल सचिवों की ऐतिहासिक भर्ती

पहली बार लिखित परीक्षा के माध्यम से 350 सचिवों की नियुक्ति की जाएगी।

इस प्रक्रिया का ड्राफ्ट एक सप्ताह में तैयार करने के निर्देश।

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पांच नवाचारपरक सहकारी मॉडल

डॉ. रावत ने बताया कि उत्तराखंड में सहकारिता के पाँच नए आधुनिक मॉडल प्रारंभ किए जाएंगे:

1. मेडिकल कोऑपरेटिव

उद्देश्य: ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में सस्ती, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं।

सेवाएं: अस्पताल, फार्मेसी, लैब, बीमा।

लाभ: स्वास्थ्य में सहकारी रोजगार, विकेन्द्रीकरण।

2. युवा सहकार

उद्देश्य: युवाओं को स्टार्टअप-सहकारी मॉडल से जोड़ना।

क्षेत्र: एग्रीटेक, ई-कॉमर्स, डेयरी, आईटी।

लाभ: नवाचार, आत्मनिर्भरता, तकनीकी समावेशन।

3. वन सहकारिता

उद्देश्य: आदिवासी/वनवासी समुदायों को वनों के उत्पादों से लाभ।

कार्य: लघु वनोपज का संग्रहण, प्रसंस्करण, विपणन।

लाभ: पर्यावरण संरक्षण, वनाधिकार का क्रियान्वयन।

4. टूरिज्म कोऑपरेटिव

उद्देश्य: ग्रामीण पर्यटन को स्थानीय युवाओं से जोड़ना।

सेवाएं: होम-स्टे, लोककला, गाइड सेवाएं।

लाभ: रोजगार, पलायन रोकथाम, सांस्कृतिक संरक्षण।

5. मल्टीनेशनल फिशरीज कोऑपरेटिव

उद्देश्य: मत्स्य पालन में अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी सहकारी मॉडल बनाना।

डॉ. रावत का संदेश

“यह हम पर निर्भर करता है कि हम पानी से आधे भरे गिलास को कैसे देखें – निराशा के रूप में या संभावनाओं के रूप में। सहकारिता में संभावनाएं अपार हैं, आवश्यकता है केवल इच्छाशक्ति और क्रियान्वयन की।”

अंत में सहकारिता मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत ने कहा कि जल्द ही पूर्व जिला सहकारी बैंक शीर्ष सहकारी समितियां के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सहकार बन्धुओं के साथ एक दिवसीय सहकार मंथन कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। सितंबर माह से लगने जा रहे सहकारिता मेलो को लेकर भी सहकारिता मंत्री द्वारा सभी तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए। अंत में उपस्थित सभी अधिकारियों कर्मचारियों को सरकार आंदोलन को व्यापक प्रचार प्रसार और बढ़ाने के संकल्प की अपील की

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नीति निर्माण हेतु 6 विषयों पर विशेषज्ञ मंथन

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में 6 विषयों पर 6 समूहों द्वारा गहन चर्चा की गई:

विषय
1. Digital Transformation of Cooperatives तकनीकी नवाचार
2.Role in Green Development हरित विकास में योगदान
3 State Cooperative Enhancement राज्य स्तरीय सहकारिता को सशक्त बनाना
4 Consumer-Centric Banking ग्राहकोन्मुख सेवा
5 Cooperative Education & Training प्रशिक्षण व दक्षता
6 Rural Innovation नवाचार आधारित ग्रामीण सहकारिता

कार्यक्रम में सुभाष रमोला, पूर्व अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक, मेहरबान सिंह बिष्ट, निबंधक सहकारिता, ईरा उप्रेती, अपर निबंधक, आनंद शुक्ल, संयुक्त निबंधक, नीरज बेलवाल, संयुक्त निबंधक, मंगला त्रिपाठी, संयुक्त निबंधक, रमिंद्री मंदरवाल, उप निबंधक, राजेश चौहान, सहायक निबंधक (मुख्यालय),मोनिका सहित अन्य विभागीय अधिकारी व जनपदों से आए एडीसीओ एवं सहकार बंधु उपस्थित रहे।

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