चारधाम में श्राइन बोर्ड नहीं, लोक धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन का विकास

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चारधाम के विकास को लेकर हुई चर्चा

चारधाम श्राइन बोर्ड नहीं, बल्कि हम उत्तराखंड की लोक धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन एवं विकास की बात कर रहे हैं। जिन लोगों की हकूकदारी पहले से बनी हुई है, उन्हीं सम्मानित जनों को साथ लेते हुए चार धामों में विकास कार्य करने हैं। चारों धामों की परंपराओं को बरकरार रखते हुए युवाओं को रोजगार देते हुए आगे बढऩा है।
यह कहना था चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं का। बुधवार को विश्व प्रसिद्ध चारधाम के विकास को लेकर चारधाम विकास परिषद में उपाध्यक्ष आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस दौरान वक्ताओं ने चार धाम के विकास को लेकर गहन चिंतन के साथ ही विस्तृत चर्चा भी की।

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बद्री केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष मोहन प्रसाद थपलियाल ने कहा कि हम हरसंभव रूप से साथ मिलकर चारधाम विकास परिषद को चारों धामों के विकास के लिए कार्य रूप देते हुए, जिसमें स्थानीय लोगों की हकूकधारी, हकदारी बनी रहे। साथ ही धार्मिक आस्थाओं को और बढ़ावा मिले, यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए प्रयासरत रहेंगे।
वहीं विशिष्ट अतिथि बद्री केदार मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने कहा कि 1939 को बद्री केदार मंदिर समिति का एक्ट बना था। उसी को साथ लेकर चार धाम विकास परिषद को विकसित करने का, जिसमें केंद्र से एवं अन्य मदों से आने वाली धनराशियों को चारों धामों में समान रूप से लगाने का कार्य किया जाएगा।
इस अवसर पर बधाणीताल पर्यटन समिति के अध्यक्ष केदार सिंह मेंगवाल, विशेष कार्याधिकारी राकेश सेमवाल, सुबोध नैथानी, मीडिया प्रभारी आशुतोष ममगाईं, प्रदीप मेंगवाल, बृजेश बडोनी आदि उपस्थित रहे।

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