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धनतेरस 2025 : धनतेरस से दीपोत्सव की होती है शुरुआत, बाजारों में छाई रौनक, खरीदारी का विशेष पर्व

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धनतेरस 2025 : धनतेरस से दीपोत्सव की होती है शुरुआत, बाजारों में छाई रौनक, खरीदारी का विशेष पर्व

देहरादून/मुख्यधारा

आज धनतेरस से दीपोत्सव पर्व शुरू हो रहा है। दिनभर खरीदारी होगी। खरीदारी के लिए 6 मुहूर्त रहेंगे। इस पावन त्योहार पर खरीदारी करने का विशेष महत्व होता है। इसके चलते बाजारों में भी काफी रौनक देखने को मिलती है। शाम को आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि के साथ कुबेर और लक्ष्मी जी की पूजा होगी। इसके बाद यमराज के लिए घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक लगाया जाएगा।

स्कंद पुराण के मुताबिक, इस दिन यमराज के लिए दीपदान करने से अकाल मृत्यु नहीं होती। धनतेरस केवल सोना खरीदने के लिए ही नहीं, बल्कि धन्वंतरि त्रयोदशी यानी भगवान धन्वंतरि के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, वे समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे और मानवता को स्वास्थ्य का उपहार लेकर आए थे। लोग इस दिन अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और कल्याण की कामना के लिए भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं। साथ ही, भक्त देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर से भी आर्थिक समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

धनतरेस पर सोना और चांदी के आभूषण और सिक्के खरीदने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन तांबे और पीतल के बर्तन खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है। धनतेरस के दिन नई झाड़ू खरीदना भी अच्छा माना जाता है।

कहते हैं कि इस दिन नई झाड़ू लाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।विष्णु पुराण के मुताबिक, समुद्र मंथन में कार्तिक महीने की बारहवीं तिथि (धनतेरस से एक दिन पहले) कामधेनु गाय निकली। अगले दिन त्रयोदशी पर धन्वंतरि सोने के कलश में अमृत लेकर प्रकट हुए। उनके हाथ में औषधियां थीं। उन्होंने संसार को अमृत और आयुर्वेद का ज्ञान दिया। यही वजह है कि इस दिन आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि की पूजा की जाती है। पुराणों में इन्हें भगवान विष्णु का अंशावतार भी माना गया है।

20 अक्टूबर को मनाई जाएगी दीपावली

छोटी दीवाली के दिन को काली चौदस के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन पर हनुमान जी की पूजा भी की जाती है। छोटी दीवाली यानी रविवार, 19 अक्टूबर पर 14 दीपक जलाने का विशेष महत्व माना गया है। इन दीयों को आप घर के अलग-अलग स्थानों जैसे मंदिर, मुख्य द्वार, रसोई और तुलसी के पास जला सकते हैं।

इस बार दीवाली सोमवार, 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष महत्व होता है। वैसे तो दीवाली के दिन घर के साथ-साथ गली-मोहल्लों को भी रोशन किया जाता है। लेकिन इस दिन पर आपको घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर दीपक जरूर जलाना चाहिए। इसके साथ ही तुलसी के पास भी दीपक जलाना शुभ माना गया है।

गोवर्धन पूजा इस बार बुधवार 22 अक्टूबर को होगी। इस दिन आप गोवर्धन पूजा के दौरान गिरिराज महाराज की नाभि पर दीपक जला सकते हैं, जो काफी शुभ माना गया है। साथ ही आप इस दिन पर घर के आंगन में दीपक जलाकर भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इस बार 23 अक्टूबर को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा।

इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन पर यमराज की पूजा का विधान है। ऐसे में आप इस दिन पर घर के बाहर यमराज के नाम का चौमुखा दीपक जला सकते हैं। यह दीपक घर की दहलीज के बाहर जलाया जाता है।

माना जाता है कि इससे जीवन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती और अकाल मृत्यु का भय भी नहीं रहता। वहीं भाई दूज के दिन घर की दक्षिण दिशा में भी तेल का दीपक जलाना काफी शुभ माना गया है।

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