ऋषिकेश में महिला आयोग ने मातृशक्ति को दिया एआई टूल्स, लाइव प्रॉम्प्टिंग, साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल कानूनों का व्यावहारिक प्रशिक्षण

Mukhyadhara
IMG 20260901 WA0033
  • उत्तराखंड राज्य महिला आयोग एवं राष्ट्रीय महिला आयोग के संयुक्त तत्वावधान में ‘यशोदा एआई एवं महिला’ राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित
  • ​”एआई क्रांति और आर्थिक विकास में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं भारत की महिलाएं”: कुसुम कण्डवाल
  • प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों, स्पेस टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर निर्माण में भी मातृशक्ति अग्रणी भूमिका में: कुसुम कण्डवाल
  • ऋषिकेश में महिला आयोग ने मातृशक्ति को दिया एआई टूल्स, लाइव प्रॉम्प्टिंग, साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल कानूनों का व्यावहारिक प्रशिक्षण

ऋषिकेश/मुख्यधारा

राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से उत्तराखंड राज्य महिला आयोग द्वारा पं. ललित मोहन शर्मा परिसर, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Yashoda AI & Women)’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय महिला जागरूकता एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि ऋषिकेश विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल, आयोग अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल, ऋषिकेश नगर निगम महापौर शंभू पासवान, परिसर निदेशक प्रो. महावीर सिंह रावत, आयोग उपाध्यक्ष चंद्रकला तिवारी एवं विधि विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन व राष्ट्रगीत के साथ किया गया।

IMG 20260901 WA00341 IMG 20260901 WA00301

​कार्यशाला में प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए राज्य महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि उत्तराखंड की मूल पहचान यहाँ की संघर्षशील और नेतृत्वकारी मातृशक्ति है। उन्होंने कहा कि तकनीक से डरने के बजाय उसे सीखने और दैनिक जीवन में सही उपयोग करने की आवश्यकता है। आज दुनिया कंप्यूटर और इंटरनेट से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में प्रवेश कर चुकी है।

उन्होंने रेखांकित किया कि एआई आधारित आर्थिक शक्ति के अंतर्गत महिला नेतृत्व के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में महिलाओं का व्यापक आर्थिक सशक्तिकरण हो रहा है और वे तेजी से समृद्धि की ओर बढ़ रही हैं।

IMG 20260901 WA00361 IMG 20260901 WA0032 1

​कण्डवाल ने राष्ट्रीय आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज स्टैंड-अप इंडिया योजना में 74 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं, जबकि मुद्रा योजना में लगभग 70 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की दर्ज है। साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट (STEM) के उच्च शिक्षण क्षेत्रों में लगभग 45 प्रतिशत छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं, जबकि देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं का योगदान लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

इसके साथ ही विश्व में सर्वाधिक महिला पायलट भारत में हैं और देश की कुल श्रमशक्ति में महिलाओं की भागीदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों, आईटी आधारित व्यवसायों तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों, चाहे वह स्पेस टेक्नोलॉजी हो या सेमीकंडक्टर निर्माण हर जगह महिलाएं अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

IMG 20260901 WA00301 1

अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने जोर देकर कहा कि 21वीं सदी की एआई क्रांति के लिए भारत की महिलाएं पूरी तरह सक्षम, आत्मविश्वासी और तैयार हैं, जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वुमेन लीड डेवेलपमेंट का मजबूत आधार पहले से सुनिश्चित किया जा चुका है। उन्होंने महिलाओं को आधुनिक तकनीक और एआई अपनाने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा के प्रति भी सजग रहने का संदेश दिया।

​मुख्य अतिथि डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीक के विकास ने हर क्षेत्र की कार्यप्रणाली को बदल दिया है। टाइपराइटर के दौर से शुरू होकर आज हम एआई के युग में पहुंच चुके हैं। आज किसान मौसम का सटीक पूर्वानुमान प्राप्त कर रहे हैं और छात्र अपनी पढ़ाई को आधुनिक रूप दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि तकनीक के सकारात्मक उपयोग के बल पर ही देश 7.8 प्रतिशत की मजबूत आर्थिक वृद्धि दर्ज करते हुए प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार कर रहा है। वहीं महापौर शंभू पासवान ने रेखांकित किया कि एआई चाहे जितना भी उन्नत हो जाए, वह मानवीय विवेक और निर्णय क्षमता का स्थान कभी नहीं ले सकता, इसलिए तकनीक के केवल सकारात्मक व उपयोगी पहलुओं को ही अपनाना चाहिए।

वहीं परिसर निदेशक प्रो. महावीर सिंह रावत ने कहा कि युवाओं को रोबोटिक्स और एआई स्किल्स विकसित कर अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाना चाहिए और तकनीक के उपयोग में विवेक को प्राथमिकता देनी चाहिए।

​कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को एआई और डिजिटल सुरक्षा का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उत्तराखंड पुलिस की स्टेट सोशल मीडिया हेड पुलिस उपनिरीक्षक रवीना (प्रतिनिधि, एसटीएफ एवं साइबर क्राइम) ने महिलाओं व बच्चों को प्रभावित करने वाले प्रमुख साइबर अपराधों जैसे साइबर स्टॉकिंग, फर्जी प्रोफाइल, डीपफेक वीडियो, वॉयस क्लोनिंग, सेक्सटॉर्शन और फिशिंग पर विस्तृत प्रकाश डाला।

उन्होंने सोशल मीडिया प्रोफाइल को प्राइवेट रखने, मजबूत पासवर्ड बनाने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करने और लाइव लोकेशन साझा न करने की हिदायत दी। किसी भी ऑनलाइन अपराध या ब्लैकमेल की स्थिति में उन्होंने साक्ष्यों URL, स्क्रीनशॉट को सुरक्षित रखकर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 एवं आधिकारिक साइबर पोर्टल पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने का आह्वान किया।

​सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी उत्तराखंड के एसटीईएम रविशंकर सिंह ने एआई को ‘डिजिटल आईना’ बताते हुए कहा कि यह शिक्षा, कंटेंट क्रिएशन और बिजनेस में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। उन्होंने बताया कि एआई व्यक्तिगत ट्यूटर के रूप में कार्य करने, पुस्तकों का संक्षेप तैयार करने, असाइनमेंट बनाने और अंग्रेजी के साथ-साथ गढ़वाली जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में भी सिखाने में सक्षम है।

करियर के संदर्भ में उन्होंने एआई द्वारा प्रभावशाली रिज्यूमे बनाने, इंटरव्यू की तैयारी, डिजिटल मार्केटिंग, ग्राफिक डिजाइन और बिजनेस आइडिया को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया समझाई। इसके उपरांत आईटीडीए के तन्मय धवन ने विभिन्न एआई टूल्स का लाइव डेमोंस्ट्रेशन दिया और प्रतिभागियों को बेसिक प्रॉम्प्टिंग के माध्यम से व्यावहारिक अभ्यास कराया।

साइबर एक्सपर्ट पुलिस उपनिरीक्षक दीप्ति लोहनी ने मोबाइल डाटा सुरक्षा, क्लाउड प्राइवेसी और असुरक्षित ऐप परमीशन से बचाव के उपाय साझा किए। साइबर व एआई लॉ एक्सपर्ट अधिवक्ता जानवी शर्मा ने डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन कानून, आईटी एक्ट के प्रावधानों और एआई जनित अपराधों के खिलाफ उपलब्ध कानूनी उपचारों की संवैधानिक जानकारी दी।

​सत्रों के समापन पर अतिथियों द्वारा विशेषज्ञों और प्रतिभागियों को सम्मान प्रमाण-पत्र व स्मृति चिह्न प्रदान किए गए। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी मंच संचालन सुनील थपलियाल द्वारा किया गया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने स्वागत गीत व दीप गीत प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भूमिका रावत एंड ग्रुप द्वारा पारंपरिक गढ़वाली समूह नृत्य और संगीतकार दिया शाह व शुभम जोशी द्वारा विशेष सांगीतिक प्रस्तुति दी गई।

अंत में राज्य महिला आयोग की सदस्य सचिव उर्वशी चौहान ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का विधिवत समापन किया।

इस अवसर पर पुलिस क्षेत्राधिकारी ऋषिकेश तुषार बोरा, महिला आयोग सदस्य विमला नैथानी, कमला जोशी, प्रेमलता, अनुका कक्कड़, पूर्व पार्षद सुंदरी कंडवाल, पार्षद माधवी गुप्ता, डॉ. शशि कंडवाल, शशि राणा, रेखा चमोली, गुड्डी कलगुड़ा, आधार वर्मा, अनीता डिमरी, मीनाक्षी मेठाणी सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि व छात्राएं उपस्थित रहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

ऋषिकेश : बिना नक्शे निर्माण पर एमडीडीए का शिकंजा

बिना नक्शे निर्माण पर एमडीडीए का शिकंजा, ऋषिकेश में व्यावसायिक उपयोग के टिन शेड समेत तीन अवैध निर्माण सील एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा – नियमों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं देहरादून/मुख्यधारा मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माण के […]
IMG 20260902 WA0022

यह भी पढ़े