कांग्रेस नेताओं को हुआ गुजरात फोबिया : मुन्ना चौहान

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कांग्रेस कह रही ‘भाजपा ऐसे कार्य कर रही है, जैसे चुनाव हो रहे हों’, बीजेपी बता रही ‘नाच न जाने आंगन टेढ़ा’ वाली कांग्रेस

देहरादून। भाजपा के विकासनगर विधायक और मुख्य प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि एक ओर पूरा देश कोरोना महामारी जैसी आपदा से जूझ रहा है तो वहीं कांग्रेस प्रदेश लगातार ओछी राजनीति करने से बाज नहीं आ रही है। नेता प्रतिपक्ष एवं कांगेस प्रदेश अध्यक्ष द्वारा लगातार गुजरात राग अलापा जा रहा है कि राज्य सरकार ने गुजरात के लोगों को बसों से भेजा, लगता है उन्हें गुजरात फोबिया हो गया है।
चौहान ने नेता प्रतिपक्ष के बयान ‘भा.ज.पा. ऐसे कार्य कर रही है, जैसे चुनाव हो रहे हों’ पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनका यह बयान ‘नाच न जाने आंगन टेढ़ा’ की कहावत को चरित्रार्थ करता है तथा उन्हें अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं तथा अपने विचार परिवार के लोगों पर फख्र है कि वे आपदा की इस घड़ी में पूरी मुस्तैदी के साथ जनता की सेवा कर रहे हैं।
चौहान ने कहा कि प्रदेश में फंसे गुजरात के लोग तीर्थयात्री थे, न कि श्रमिक, मजदूर। देश में कोई भी यात्री अतिथि होता है, किन्तु कांग्रेस अपनी कुंठित मानसिकता का परिचय देने से बाज नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि गुजरात ही नहीं राजस्थान, हरियाणा और पश्चिम बंगाल समेत तमाम जो भी तीर्थ यात्री अपने प्रदेश में फंसे हुए हैं। राज्य सरकार उन्हें भी उनके घरों को भिजवाने का कार्य कर रही थी, किन्तु तब तक केन्द्र सरकार द्वारा लाकडाउन के प्रावधन सख्त कर दिये, जिससे अन्य राज्यों के लोगों को नहीं भिजवाया जा सका तथा भविष्य में समय मिलते ही अन्य राज्यों के तीर्थ यात्रियों को भी उनके गन्तव्य तक पहुंचाने के लिए सरकार योजना बना रही है।
प्रवासी कामगारों, छात्रों एवं तीर्थयात्रियों, जो लॉकडाउन की वजह से फंसे हुए हैं, उन सभी के सामने काफी दिक्कतें तो हैं, किन्तु सभी की परिस्थितियां अलग-अलग है। छात्रों एवं तीर्थयात्रियों की परिस्थितियों की तुलना प्रवासी कामगारों से नहीं की जा सकती है, किन्तु मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार अन्य राज्यों में फंसे हुए अपने प्रदेश के सभी प्रवासी कामगारों की मानवीय आवश्यकताओं एवं सुविधाओं को पूर्ण करने के लिए अन्य प्रदेशों की सरकारों से समन्वय कर सुनिश्चित कर रही है।
राज्य सरकार भारत सरकार के श्रम विभाग से समन्वय स्थापित कर प्रदेश के प्रवासी कामगारों को अन्य सुविधायें भी मुहैया करायी जा सकें। कांग्रेस को शायद यह भी मालूम नहीं कि राज्य सरकार ने बकायदा एक कंट्रोल रूम स्थापित किया हुआ है, जिसमें एक सचिव रैंक के अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो कि कंट्रोल रूम में आने वाली प्रत्येक प्रवासी के टेलीफोन को स्वयं संज्ञान में लेकर सम्बन्धित राज्य सरकार के नोडल अधिकारी से बात करके उनके खान-पान अथवा अन्य परेशानी को दूर करने के लिए वार्ता कर पुन: उन्हें फोन कर पूछा जाता है कि उनकी परेशानी का सामाधन हुआ कि नहीं।
इतना ही नहीं मुम्बई में रहने वाले सर्वाधिक प्रवासी कामगारों की परेशानियों को देखते हुए एक सचिव स्तर के अधिकारी को वहीं पर अर्थात मुम्बई में ही तैनात किया गया है, ताकि वे उत्तराखण्ड के प्रवासी कामगारों की समस्याओं का वहीं मौके पर निस्तारण कर सकें।

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