- अंकिता भंडारी की पुण्यतिथि पर कांग्रेस ने भाजपा पर किया कटाक्ष : “भाजपा के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी…”
- 18 सितंबर को है उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी की पुण्यतिथि : गरिमा मेहरा दसौनी
- 18 सितंबर 2022 को हुई थी अंकिता की हत्या
- अंकिता की मां की आंखों का इंतजार और उत्तराखंड के सवाल तब तक जिंदा रहेंगे, जब तक पूरा सच सामने नहीं आता
देहरादून/मुख्यधारा
उत्तराखंड भाजपा इन दिनों उत्सवों और जन्मदिनों में इतनी व्यस्त है कि उसे शायद अपने ही प्रदेश की उस बेटी की याद नहीं आ रही, जिसकी हत्या ने पूरे उत्तराखंड की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था। ये कहना है उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी का।
16 सितंबर को मुख्यमंत्री का जन्मदिन, 17 सितंबर को प्रधानमंत्री का जन्मदिन और फिर कई दिनों तक जन्मदिन समारोहों का आयोजन होगा, लेकिन 18 सितंबर आते ही कैलेंडर में एक तारीख ऐसी भी आती है,जब उत्तराखंड भाजपा को सांप सूंघ जाता है उस तारीख पर, जिसे उत्तराखंड कभी भूल नहीं सकता। इस बार अंकिता भंडारी की चौथी पुण्यतिथि है।

उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा के नेताओं से मेरा सिर्फ इतना सवाल है कि जिस प्रदेश की बेटी के लिए पूरा उत्तराखंड सड़कों पर उतर आया था, क्या उसकी चौथी पुण्यतिथि पर आपके पास दो आंसू भी नहीं हैं?” उसकी पुण्यतिथि की कोई तैयारी नहीं?
अंकिता सिर्फ पौड़ी गढ़वाल की बेटी नहीं थी, वह उत्तराखंड की बेटी थी। वह उन लाखों पहाड़ी बेटियों का चेहरा थी, जो अपने सपनों को लेकर घर से निकलती हैं और अपने माता-पिता का भविष्य संवारने का सपना देखती हैं, लेकिन अंकिता के साथ क्या हुआ, यह आज भी उत्तराखंड के जमीर को झकझोरता है।
गरिमा ने कहा कि 18 सितंबर 2022 को अंकिता की हत्या हुई। मामले में तत्कालीन पुलिस जांच, वनंत्रा रिजॉर्ट, राजनीतिक रसूख, कथित VIP कनेक्शन, रिजॉर्ट में तोड़फोड़ और साक्ष्यों से जुड़े सवालों ने पूरे प्रदेश के सामने कई गंभीर प्रश्न खड़े किए, लेकिन क्या अंकिता को पूरा न्याय मिल गया? यह सवाल आज भी जिंदा है।
अंकिता के माता-पिता लगातार उन तमाम सवालों के जवाब मांगते रहे हैं, जिनका संबंध कथित VIP एंगल और पूरे घटनाक्रम की उन परतों से है, जो आज भी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुई है। सरकार ने आखिरकार जनवरी 2026 में CBI जांच की सिफारिश की तथा फरवरी 2026 में CBI ने मामले को अपने हाथ में लिया, तो उत्तराखंड की जनता को उम्मीद जगी कि अब उन सवालों के जवाब मिलेंगे, जिनसे राज्य सरकार की जांच पर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन आज सवाल है- CBI जांच में अब तक क्या हुआ?
क्या जांच की प्रगति पर उत्तराखंड की जनता को कोई विस्तृत जानकारी दी गई?
क्या कथित VIP एंगल की पूरी पड़ताल हुई?
क्या उन सभी सवालों के जवाब तलाशे गए, जिनको लेकर अंकिता के माता-पिता और प्रदेश की जनता लगातार आवाज उठाते रहे हैं?
क्या यह पता लगाने की कोशिश हुई कि अंकिता को किन परिस्थितियों में मौत की ओर धकेला गया?
क्या उन तमाम लोगों की भूमिका की जांच हुई, जिनके नाम या संदर्भ इस मामले में समय-समय पर सामने आते रहे?
गरिमा ने कहा उत्तराखंड सच जानना चाहता है। अंकिता के माता-पिता जानना चाहते हैं। और सबसे बढ़कर, अंकिता की आत्मा न्याय चाहती है।
दसौनी ने कहा कि भाजपा के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के जन्मदिन मनाने से उत्तराखंड की जनता को कोई सरोकार नहीं। जन्मदिन मनाइए, शुभकामनाएं दीजिए—लेकिन उत्तराखंड की बेटी की शहादत को राजनीतिक सुविधा के अनुसार मत भूलिए।
केक काटने और उत्सव मनाने से सरकार की जिम्मेदारियां खत्म नहीं हो जातीं।
18 सितंबर को अंकिता की तस्वीर के सामने खड़े होकर भाजपा को खुद से पूछना चाहिए- क्या अंकिता को वह पूरा न्याय मिला, जिसका वादा उत्तराखंड से किया गया था?”
भाजपा नेता बार-बार महिला सुरक्षा, बेटी बचाओ और नारी सम्मान की बातें करते हैं। लेकिन उत्तराखंड पूछ रहा है कि अंकिता के मामले में उन तमाम अनुत्तरित सवालों का जवाब कब मिलेगा?
आज जरूरत राजनीतिक भाषणों की नहीं, सच सामने लाने की है।
अंकिता भंडारी की चौथी पुण्यतिथि पर कांग्रेस की मांग स्पष्ट है-
CBI जांच की प्रगति सार्वजनिक की जाए।
VIP एंगल सहित सभी अनुत्तरित सवालों की निष्पक्ष जांच हो।
अंकिता के परिवार को जांच की स्थिति की पूरी जानकारी दी जाए।
और जो भी व्यक्ति किसी भी स्तर पर कानून और न्याय की राह में बाधा बना हो, उसकी भूमिका सामने लाई जाए।
गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा अंकिता भंडारी हमारे लिए कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। वह उत्तराखंड की बेटी थी, है और हमेशा रहेगी। भाजपा चाहे उसे भूल जाए, उत्तराखंड नहीं भूलेगा।
जन्मदिन हर साल आते-जाते रहेंगे, लेकिन अंकिता की मां की आंखों का इंतजार और उत्तराखंड के सवाल तब तक जिंदा रहेंगे, जब तक पूरा सच सामने नहीं आता। अंकिता को न्याय मिले—यही उत्तराखंड की आवाज है।


