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दुर्गम गांवों तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने वाले महावीर रवांल्टा सेवानिवृत्त

Mukhyadhara
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  • दुर्गम गांवों तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने वाले महावीर रवांल्टा सेवानिवृत्त
  • 37 साल तक पहाड़ के दुर्गम इलाकों में जलती रही सेवा की मशाल

नीरज उत्तराखंडी/पुरोला

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुरोला का सभागार उस समय भावुक माहौल से भर गया, जब स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ एवं समर्पित अधिकारी मुख्य फार्मेसी अधिकारी महावीर रवांल्टा को 37 वर्ष 4 माह 6 दिन की गौरवपूर्ण एवं निष्कलंक सेवा के उपरांत सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। विदाई-सह-सम्मान समारोह में अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और शुभचिंतकों ने उन्हें अभिनंदन-पत्र, स्मृति चिह्न एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर उनके दीर्घकालीन योगदान को नमन किया।

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समारोह के दौरान कई वक्ताओं की आंखें उस समय नम हो गईं, जब उन्होंने रवांल्टा के संघर्षपूर्ण सेवाकाल और जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि महावीर रवांल्टा ने केवल एक स्वास्थ्यकर्मी के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान, समाजसेवी और साहित्यकार के रूप में भी समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

वर्ष 1988 में फार्मासिस्ट के रूप में स्वास्थ्य विभाग में अपनी सेवा शुरू करने वाले महावीर रवांल्टा ने सीमांत और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत-तिब्बत सीमा से लगे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों, घरपा, फिरोजपुर, आराकोट और पुरोला जैसे दूरस्थ इलाकों में कार्य करते हुए उन्होंने अपने कर्तव्य को सदैव सर्वोपरि रखा।

विशेष रूप से आराकोट क्षेत्र में चिकित्सकों की कमी के दौरान उन्होंने वर्षों तक स्वास्थ्य सेवाओं का सफल संचालन कर लोगों के लिए भरोसे का केंद्र बने रहे। उन्होंने मरीजों के उपचार के साथ-साथ टीकाकरण, परिवार नियोजन, जनजागरूकता अभियानों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को भी पूरी निष्ठा से संचालित किया।

उनकी कार्यशैली का सबसे प्रेरणादायक पक्ष यह रहा कि वे जखोल, ओसला, लिवाड़ी, फिताड़ी, सिरगा और अन्य दुर्गम गांवों तक पैदल पहुंचकर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराते रहे। विषम परिस्थितियों और कठिन रास्तों के बावजूद उन्होंने कभी अपने दायित्वों से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया।

समारोह में उपस्थित कर्मचारियों ने कहा कि महावीर रवांल्टा का व्यवहार सदैव सरल, सहयोगात्मक और प्रेरणादायक रहा। उन्होंने अपने अनुभव और कार्यशैली से युवा स्वास्थ्यकर्मियों को सेवा, संवेदना और मानवता का पाठ पढ़ाया।

अपने संबोधन में महावीर रवांल्टा ने स्वास्थ्य विभाग, सहकर्मियों और क्षेत्र की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें हमेशा लोगों की सेवा करने का सौभाग्य मिला, जिसे वे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ के दूरस्थ गांवों में कार्य करते हुए जनता से मिला स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।

समारोह के अंत में उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं शुभचिंतकों ने उनके स्वस्थ, सुखमय एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। सभी ने एक स्वर में कहा कि महावीर रवांल्टा का अनुभव, सेवा भावना और मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

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