रस्सी जल गई बल नहीं गया : नेपाल में सरकार का तख्तापलट हो गया लेकिन पूर्व पीएम ओली की अकड़ नहीं गई, पूरा दोष भारत पर ही मढ़ दिया
शंभू नाथ गौतम
आज बात करेंगे नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की । कहते हैं रस्सी जल गई बल नहीं गया। ऐसे ही नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ओली हैं। खराब शासन और भ्रष्टाचार के बल पर सरकार चलाने वाले नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली का युवाओं ने तख्तापलट कर दिया। इसके बावजूद अभी इस नेता की अकड़ नहीं गई है। नेपाल में हुए हिंसक वारदात और अपनी सरकार का तख्तापलट का दोष भारत पर मढ़ दिया है।
नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली ने नाम लिए बिना तख्तापलट के लिए भारत को दोष दिया है। उन्होंने कहा कि राम नेपाल में जन्में थे और लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा हमारा है। मैं इन बयानों से पीछे हट जाता तो मुझे और मौके मिलते। वहीं दूसरी ओर नेपाल में अब युवाओं का आक्रोश धीमे-धीमे कम हो रहा है। नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस रह चुकीं सुशीला कार्की आज देश की अंतरिम पीएम बनेंगी। कल आंदोलन से जुड़े 5000 युवाओं ने वर्चुअल मीटिंग की, जिसमें उनके नाम पर सहमति बन गई।
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सुशीला कार्की किसान परिवार में जन्मीं हैं और 7 भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर बनें। उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) से राजनीति शास्त्र में मास्टर्स किया है। उन्होंने 1979 में वकालत में अपना करियर शुरू किया। सुशीला कार्की 11 जुलाई 2016 से 6 जून 2017 तक नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश थीं। 2017 में उनके खिलाफ महाभियोग लाया गया था। सुशीला कार्की पर पूर्वाग्रह और कार्यपालिका में हस्तक्षेप का आरोप लगा था। सुशीला ने कई हाई-प्रोफाइल मामलों में फैसले दिए हैं। इनमें 2012 में पूर्व सूचना मंत्री जयप्रकाश गुप्ता को भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराना प्रमुख है। डीआईजी जयबहादुर चंद की डीजीपी के रूप में नियुक्ति को रद किया। कोर्ट ने इसे सरकार की मनमानी और नियमों के खिलाफ बताया था।
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली लंबे समय से भारत के खिलाफ जहर उगलते रहे हैं
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली लंबे समय से भारत के खिलाफ विरोधी बयान देते रहे हैं। इस नेता को चीन का समर्थक माना जाता है। 10 साल पहले 2015 में नेपाल में आए नए संविधान के बाद भारत-नेपाल संबंध तनावपूर्ण हुए। उस समय ओली ने कहा था कि भारत ने नेपाल पर “अघोषित नाकाबंदी” थोप दी है। उन्होंने भारत पर आरोप लगाया था कि नेपाल की जनता को खाने-पीने की वस्तुएं, ईंधन और दवाइयों से वंचित करने की साजिश की गई। ओली ने कहा था कि भारत नेपाल की स्वतंत्र विदेश नीति नहीं चाहता और हर सरकार को दबाव में लेकर अपनी बात मनवाता है। वहीं 2020 में नक्शा विवाद के दौरान उन्होंने संसद में कहा था “भारत ने हमारी जमीन पर कब्जा कर रखा है और अब हम अपनी भूमि वापस लेंगे। उसी दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि नेपाल-भारत सीमा विवाद को हवा देने के पीछे भारत की ‘विस्तारवादी नीति’ है। उन्होंने भारत को “कोरोना से भी बड़ा वायरस” करार दिया था और कहा था कि भारत से नेपाल में संक्रमण आ रहा है। ओली ने कई बार यह आरोप दोहराया कि भारत नेपाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन करवाने में शामिल रहता है। यहां तक कि नेपाल के कुछ मीडिया घरानों को भी भारत का समर्थक बताते हुए उन्होंने कहा था कि भारत पैसे और दबाव से नेपाल में माहौल बिगाड़ता है। पिछले दिनों चीन में शंघाई शिखर सम्मेलन के दौरान भी नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने लिपुलेख का मुद्दा उठाया था। उनके इस बयान पर चीनी राष्ट्रपति ने सीधे ही कहा इस मामले में आप भारत के साथ बात कीजिए। फिलहाल नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री किसी अज्ञातवास में समय काट रहे हैं। सरकार चली गई गद्दी चली गई फिर भी ओली की अकड़ नहीं गई ।
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