71 वर्ष पहले आज ही के दिन मिला था देश को “तिरंगा” और आज ही “चन्द्रयान – 2” का हुआ सफल प्रक्षेपण

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पवन दूबे
पन्तनगर, आज सारे विश्व की नजरें हमारे देश पर टिकी हुई थीं और हो भी क्यों न, जब आज श्रीहरिकोटा से इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा मिशन चन्द्रयान – 2 को सफलता पूर्वक अंजाम दिया। मिशन चन्द्रयान – 2 की मिशन डायरेक्टर रितु करिधाल और प्रोजेक्ट डायरेक्टर एम. वनिता के नेतृत्व में यह पूरा मिशन आज सफलता पूर्वक अपने पहले पड़ाव को पार कर गया। युवा समाज सेवी पवन दूबे ने इसरो के सभी वैज्ञानिकों और उनके सहयोगियों को जो इस मिशन का हिस्सा थे के साथ – साथ देशवासियों को बधाई प्रेषित की है। उन्होंने बताया कि चन्द्रयान – 2 का प्रक्षेपण आज के दिन होना स्वयं में ऐतिहासिक है और पूर्व में भी यह दिन ऐतिहासिक था जिसका ज्यादा लोगों को पता नहीं है। पवन ने बताया कि आज से 71 वर्ष पहले आज ही के दिन देश को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में तिरंगा मिला था और आज के ही दिन हमारे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वैज्ञानिकों द्वारा चन्द्रयान -2 का सफल प्रक्षेपण कर देश को पुन: गौरवान्वित करने का काम किया है। पवन ने बताया कि गौर करने वाली बात है कि यह सिर्फ संयोग मात्र है क्योंकि वैज्ञानिकों ने 15 जुलाई को मिशन के प्रक्षेपण से 56 मिनट 24 सेकंड पहले मिशन नियंत्रण कक्ष से घोषणा के बाद रात 1.55 बजे इसे तकनीकी गड़बड़ी आने के कारण रोक दिया गया था। चेन्नई से लगभग 100 किलोमीटर दूर सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र में दूसरे लांच पैड से चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण आज अपराह्न 2 बजकर 43 मिनट पर किया गया। इस मिशन की लागत 978 करोड़ रुपये है। बताया कि इसरो के अनुसार ‘चंद्रयान-2′ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा, जहां वह इसके अनछुए पहलुओं को जानने का प्रयास करेगा, यहाँ अब तक कोई देश नहीं गया है। इससे 11 साल पहले इसरो ने अपने पहले सफल चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-1′ का प्रक्षेपण किया था जिसने चंद्रमा के 3,400 से अधिक चक्कर लगाए और यह 29 अगस्त, 2009 तक 312 दिन तक काम करता रहा। पवन ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि “चन्द्रयान – २” का सफल प्रक्षेपण अपने आप में गौरवान्वित करता है व दुनिया को भारत की सशक्तता और वैज्ञानिकता का प्रमाण देता है। मन और प्रफुल्लित होता है जब इस तरह के मिशन के पीछे मुख्य चेहरा किसी महिला का होता है क्योंकि पुरूष प्रधान देश या यूं कहें पितृसत्तात्मक देश में महिला को आगे नेतृत्व करने के लिए रखा जाए जोकि बखूबी किया भी गया है इस मिशन की मिशन डायरेक्टर – रितु करिधाल और प्रोजेक्ट डायरेक्टर – एम. वनिता द्वारा देश को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को बता दिया गया कि महिला होना कोई श्राप नहीं अपितु गर्व की बात है। 

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