मुख्यमंत्री सहित ठंड के डर से गैरसैंण से देहरादून भागे भाजपा के 30 विधायक

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मौसम प्रतिकूल होते ही सरकार और सत्ताधारी दल के अधिकांश सदस्य सत्र की परवाह किए बिना गैरसैंण छोड़ गए
गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने के ठीक दो दिन बाद ही सरकार के ज्यादातर मंत्री और विधायक बजट सत्र का पहला चरण पूरा हुए बिना ही ठंड से डरकर यहां से रुखसत हो गए हैं। सत्र के 5वें दिन शुक्रवार को सत्ताधारी दल के मात्र 27 विधायक सदन में मौजूद रहे, जबकि विपक्ष के सभी सदस्य कार्यवाही पूरी होने तक सदन में डटे रहे।
हैरानी की बात यह है कि पूरे दिन सरकार की ओर से एकमात्र कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक विपक्ष के हमलों को अकेले झेलते रहे। मुख्यमंत्री समेत अन्य सभी मंत्री गैरसैंण से जा चुके थे।
त्रिवेन्द्र सरकार ने भराड़ीसैंण में आयोजित बजट सत्र में दो दिन पहले ही गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का ऐलान किया था। उस वक्त मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि पृथक राज्य के आंदोलनकारी शहीदों के सपने पूरा करने और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए यह निर्णय लिया है।
सरकार के इस निर्णय से पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों के विकास में गति आएगी। सरकार अपने इस ऐलान के प्रति गंभीर नजर नहीं आई, जब सदन के पांचवें दिन मदन कौशिक को छोड़कर मुख्यमंत्री समेत उनके सभी मंत्री नदारद दिखे।
विपक्ष ने मौके को लपकते हुए गैरसैंण के मुद्दे पर सरकार की मंशा में खोट होने का आरोप लगाया।
प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि जो सरकार पांच दिन के विधानसभा सत्र में गैरसैंण में नहीं टिक पा रही है, वह कैसे इसकी हितैषी हो सकती है। उन्होंने कहा कि मौसम प्रतिकूल होते ही सरकार और सत्ताधारी दल के अधिकांश सदस्य सत्र की कोई परवाह किए बिना गैरसैंण छोड़ गए।
इधर, सत्र के पांचवें दिन सरकार की ओर से सदन में उपस्थित इकलौते मंत्री मदन कौशिक ने अकेले मोर्चा संभाला। नियम 58 के तहत विपक्ष की ओर से उठाए गए सर्किल रेट और खनन कार्य में संलग्न एक निजी कम्पनी को काम न दिये जाने के आरोपों का भी कौशिक ने विपक्ष को जवाब दिया। बजट पर चर्चा के दौरान कौशिक ने सरकार की ओर से पक्ष रखा। आज सदन में गनीमत रही कि सरकार के अधिकांश मंत्रियों और विधायकों की गैरमौजूदगी के बावजूद विपक्ष ने कोई ऐसा मुद्दा नहीं उठाया, जिससे सरकार के सामने मुश्किल पेश आती। भोजनावकाश से पहले करीब डेढ़ बजे विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने सदन की कार्यवाही 25 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी।
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”बजट सत्र विधानसभा का सबसे महत्वपूर्ण सत्र होता है। हम लगातार मांग कर रहे थे कि बजट सत्र की अवधि बढाई जानी चाहिए लेकिन सत्र के पहले चरण के पूरा होने से पहले ही सरकार के मंत्री और विधायक गैरसैंण छोड़कर चले गए। यह उनकी गैरसैंण के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।”
– इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष
”बजट सत्र जैसे महत्वपूर्ण सत्र में मंत्रियों और विधायकों को मौजूद रहना चाहिए। आज की स्थिति चिंताजनक रही। मैं विधायकों से आग्रह करूंगा कि आगे इसकी पुनरावृत्ति न हो।” 
 – प्रेमचंद अग्रवाल, अध्यक्ष, विधानसभा
”आज सदन में सत्ता पक्ष के 30 से 40 विधायक मौजूद रहे। मौसम खराब होने की वजह से कुछ विधायक जरूर सदन में नहीं पहुंच पाए। अधिकांश विधायकों की गैरमौजूदगी का विपक्ष का आरोप निराधार है।”
– मदन कौशिक, संसदीय कार्यमंत्री

(साभार दीपक फर्सवाण)

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