पिथौरागढ : चीतों के जश्न के बीच उत्तराखंड की ढाई साल की बच्ची को मां की पीठ से खींचकर ले गया तेंदुआ (Leopard), छिन गई खुशियां

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पिथौरागढ़/मुख्यधारा

बड़ी अजीब विडंबना है कि जिस 135 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में नामीबिया से आने वाले आठ चीतों का मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में आने पर जश्न मनाया जा रहा था, वहीं देवभूमि उत्तराखंड की एक ढाई साल की अबोध बच्ची को खूंखार तेंदुआ (Leopard) उसकी मां की पीठ से ही जबरन छीनकर ले गया। यह क्षण इस परिवार के लिए सबसे दु:खदायी था। इसके साथ ही परिजनों की खुशियां भी हमेशा के लिए छिन गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पिथौरागढ़ जनपद के बेरीनाग तहसील के अंतर्गत ग्राम चचड़ेत में गत रात्रि बड़ी दु:खदायी घटना घटित हुई। बताया गया कि शनिवार रात्रि में गांव में गौं-त्यार मनाया जा रहा था। इस दौरान बहादुर सिंह, कौशल्या देवी, विजय सिंह और पान सिंह की पत्नी कविता भी आंगन में खड़े थे।

कविता की पीठ पर उसकी ढाई साल की मासूम बच्ची भारती पुत्री पान सिंह भी थी। इसी क्षण में घात लगाकर बैठे तेंदुआ (Leopard) ने अचानक कविता की पीठ पर झपट्टा मार दिया और मासूम बच्ची को खींचकर ले गया। अचानक हुए हमले को देख परिजन भी सकपका गए और हो-हल्ला मचाते हुए उसके पीछे दौड़े। इस दौरान गांव के कुछ और लोग भी पहुंच गए। बताया गया कि करीब डेढ-दो सौ मीटर दूरी पर बच्ची का शव मिल गया। यह देख परिजनों के बीच कोहराम मच गया। घटना के बाद गांव में लोग खौफजदा हैं।

इस घटना की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई। जिस पर वन क्षेत्राधिकारी चंद्रा मेहरा व उनकी टीम मौके घटनास्थल पर पहुंची। ग्रामीणों ने इस घटना पर कड़ा आक्रोश जताते हुए तेंदुआ (Leopard)को पकडऩे के लिए यहां पिंजरा लगाने की मांग की है।

इस दु:खद खबर की सूचना पर विधायक फकीर राम टम्टा, एसडीएम अनिल शुक्ला, थाना प्रभारी मनोज पांडे सहित काफी संख्या में क्षेत्रवासी पहुंच गए। उन्होंने परिजनों को सांत्वना दी और वन विभाग को पीडि़त परिजनों को शीघ्र मुआवजा देने की मांग की।

निरंतर बढ़ रहा मानव-वन्य जीव का संघर्ष

बताते चलें कि उत्तराखंड में मानव-वन्य जीव का संघर्ष निरंतर बढ़ता जा रहा है। 13 जनपदों वाले छोटे से प्रदेश में करीब 10 से 15 दिनों के अंतराल में इस तरह की एक घटना घट रही है। जो बहुत कम आबादी वाले गांवों के लिए बहुत बड़ा खतरा बनता जा रहा है। इस तरह की डरावनी घटनाओं के कारण प्राय: यह भी देखने को मिल रहा है कि लोग अपने गांवों को छोड़ निकटवर्ती कस्बों या शहरों में जाने को विवश हो रहे हैं।

बताते चलें कि जिस परिवार के साथ उपरोक्त घटना घटी, वह भी इस इलाके में अकेला रहता है। मृतक बच्ची का पिता पान सिंह रोजगार के लिए पहले ही शहर जा चुका है। इस घटना की खबर मिलते ही वे अपने गांव के लिए रवाना हुए।

पहले भी दो बच्चों को बनाया जा चुका है निवाला

बेरीनाग तहसील के अंतर्गत करीब डेढ साल पहले भी भट्टी गांव में एक नौ साल की बच्ची और साढे तीन वर्ष पहले जाख में पांच साल के बच्चे को भी मार डाला था।

कुल मिलाकर खूंखार गुलदार-तेंदुआ आदि जंगली जानवरों से बचने के लिए पहाड़ वासियों को उचित सुरक्षा इंतजाम उपलब्ध नहीं हुए तो यह आने वाले समय में गंभीर समस्या बन सकती है!

सीएम धामी ने जताया गहरा दु:खद

इस घटना पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा दु:ख जताया है। उन्होंने इस मामले में प्रमुख सचिव वन तथा प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव को शीघ्र प्रभावी कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद आज डीएफओ भी गांव में पहुंचे और पीडि़त परिजनों को सांत्वना दी। साथ ही आंशिक रूप से अनुमन्य अनुग्रह राशि भी भेंट की। गांव में दो पिंजरे लगा दिए गए हैं। इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री श्री धामी ने वन विभाग को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

 

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